
डिजिटल करेंसी ई-रुपी का 1 दिसंबर को होगा पायलट लॉन्च, जानें इससे जुड़ी सभी अहम बातें
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 दिसंबर को देश की पहली डिजिटल करेंसी ई-रुपी (डिजिटल रुपी) का पायलट लॉन्च करेगा।
आज इस संबंध में बयान जारी करते हुए उसने कहा कि इस पायलट लॉन्च में आठ बैंक शामिल होंगे और इसके जरिए ई-रुपी के निर्माण से लेकर इसके रिटेल उपयोग तक, पूरी प्रक्रिया की मजबूती परखी जाएगी।
आइए आपको बताते हैं कि ई-रुपी आखिर है क्या, इसका कहां इस्तेमाल किया जा सकेगा और पायलट लॉन्च में क्या-क्या होगा।
परिचय
क्या है ई-रुपी?
ई-रुपी भारत की मुद्रा रुपया का डिजिटल स्वरूप है। यह डिजिटल टोकन के रूप में होगा और पारंपरिक रुपये की तरह एक लीगल टेंडर होगा।
इसकी कीमत रुपये के बराबर होगी यानि 100 ई-रुपी 100 रुपये के बराबर होंगे।
ई-रुपी उन्हीं मूल्यों में उपलब्ध होगा जिनमें नोट और सिक्के उपलब्ध होते हैं। इसका मतलब यह केवल एक, दो, पांच, 10, 20, 50, 100, 500 और 2,000 रुपये के मूल्यों में उपलब्ध होगा।
इसे आसानी से नकदी में बदला जा सकेगा।
इस्तेमाल
किन-किन कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा ई-रुपी?
ई-रुपी को लगभग हर उस कार्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिसके लिए नोट और सिक्के इस्तेमाल किए जाते हैं।
यूजर्स ई-रुपी को अपने फोन में एक डिजिटल वॉलेट में स्टोर कर सकेंगे और इसके जरिए किसी भी व्यक्ति या दुकानदार को भुगतान कर सकेंगे। दुकानदारों को QR कोड स्कैन करके भुगतान किया जा सकेगा।
ये सारी सुविधाओं बैंकों के जरिए प्रदान की जाएंगी, हालांकि इसके लिए बैंक अकाउंट होना अनिवार्य नहीं होगा।
फायदा
ई-रुपी से क्या फायदा होगा?
ई-रुपी आने से व्यापार में पैसों का लेनदेन आसान होगा, मोबाइल वॉलेट की तरह सेकंड में बिना इंटरनेट के लेनदेन हो सकेगा, नकली नोट की समस्या से छुटकारा मिलेगा और नोटों की छपाई का खर्च बचेगा।
ई-रुपी की मदद से सरकार लेनदेन पर बेहतर नजर रख सकेगी और इससे मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और धोखाधड़ी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
रियम टाइम डाटा उपलब्ध होने के कारण ई-रुपी की मदद से बेहतर नीतियां भी बनाई जा सकेंगी।
तुलना
क्या ई-रुपी और क्रिप्टोकरेंसी एक हैं?
RBI का ई-रुपी क्रिप्टोकरेंसी से कई मायनों में अलग है। क्रिप्टोकरेंसी डिसेंट्रलाइज्ड होती है और लीगल टेंडर नहीं मानी जाती।
क्रिप्टोकरेंसी की कीमत बहुत अस्थिर होती है, जबकि ई-रुपी को स्थिरता और सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है।
RBI का कहना है कि क्रिप्टो का प्रसार मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग के खतरे को बढ़ाता है और इसमें कालेधन का बड़े पैमाने पर निवेश होता है। ई-रुपी इन सभी मामलों में सुरक्षित होगा।
पायलट लॉन्च
ई-रुपी के पायलट लॉन्च में क्या होगा?
ई-रुपी के पायलट लॉन्च में आठ बैकों के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से पूरी व्यवस्था की मजबूती परखी जाएगी।
पहले चरण में भारतीय स्टेट बैंक, ICICI बैंक, यस बैंक और IDFC बैंक शामिल होंगे और कुछ समय बाद यूनियन बैंक, HDFC बैंक, बड़ौदा बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक भी इसमें शामिल हो जाएंगे।
शुरूआती चरण में केवल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू और भुवनेश्वर में ये पायलट लॉन्च होगा और फिर अन्य नौ शहरों में इसका विस्तार किया जाएगा।
डिजिटल करेंसी
न्यूजबाइट्स प्लस
अभी तक जमैका, बहामास, एंटीगुआ और बारबुडा, सेंट किट्स एंड नेविस, मॉन्सेरट, डोमिनिका, सेंट सुलिया, सेंट विन्सेंट और ग्रेनेडाइन, ग्रेनाडा और नाइजीरिया समेत 10 देशों में डिजिटल करेंसी जारी हो चुकी है।
अमेरिका, इंग्लैंड और कनाडा आदि देश भी केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित डिजिटल करेंसी जारी करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। चीन भी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किए गए डिजिटल युआन (e-CNY) का विस्तार करने की योजना बना रहा है।