
ओला सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक पर कर रही काम, जानिए क्या होगा फायदा
क्या है खबर?
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में दबदबा कायम करने के बाद अब ओला इलेक्ट्रिक बैटरी तकनीक में अग्रणीय कंपनी बनने का लक्ष्य बना रही है।
इसी को लेकर वह भारत में स्वदेशी रूप से अपनी बैटरी सेल बनाने की योजना बना रही है।
EV निर्माता ने खुलासा किया है कि वह EVs की लागत कम करने के लिए सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक पर काम कर रही है, जिसे दुनिया की सबसे उन्नत और कुशल सेल प्रौद्योगिकियों में से एक बताया है।
बयान
2030 तक ओला के EVs में मिलेगी सॉलिड-स्टेट बैटरी
HT ऑटो के साथ बातचीत में ओला के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भाविश अग्रवाल ने कहा, "कंपनी भारतीय EV क्षेत्र में व्यापक विकास के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपना रही है।"
उन्होंने आगे कहा इस रणनीति में तमिलनाडु के पोचमपल्ली में गीगाफैक्ट्री का निर्माण करने के साथ नई बैटरी तकनीकों को विकसित करना भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि संभवतः 2030 से पहले ओला अपने वाहनों में सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक का उपयोग कर सकती है।
फायदा
3 बैटरी तकनीकों पर काम कर रही ओला
सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक इलेक्ट्रोलाइट-आधारित लिथियम-आयन बैटरी पैक की तुलना में अधिक ऊर्जा घनत्व प्रदान करने के साथ अधिक सुरक्षित और ज्यादा रेंज देती है।
ये बैटरियां वाहन के वजन को कम करने और थर्मल दक्षता में सुधार करने में भी मदद करती हैं। इसके अलावा यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहन के लिए फास्ट चार्जिंग और लंबी बैटरी लाइफ भी प्रदान करती है।
ओला वर्तमान में इलेक्ट्रोलाइट-आधारित लिथियम-आयन बैटरी के अलावा, सोडियम-आयन बैटरी तकनीक और सॉलिड-स्टेट बैटरी पर काम कर रही है।