
फ्रांस के अगले प्रधानमंत्री होंगे फ्रांस्वा बायरू, राष्ट्रपति मैक्रों ने किया ऐलान
क्या है खबर?
फ्रांस में महीनों से चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस्वा बायरू को अगला प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।
मैक्रों के सहयोगी बायरू फ्रांस के पाउ शहर के महापौर हैं और MoDem पार्टी का नेतृत्व करते हैं। बायरू को मध्यमार्गी नेता माना जाता है और उनकी पार्टी मैक्रों की सरकार में सहयोगी भी है।
बता दें कि पिछले हफ्ते मिशेल बार्नियर ने फ्रांस के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
इस्तीफा
पिछले हफ्ते बार्नियर ने दिया था इस्तीफा
5 दिसंबर को मिशेल बार्नियर ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बार्नियर सिर्फ 3 महीने प्रधानमंत्री रहे, जो फ्रांसीसी इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री का सबसे छोटा कार्यकाल है।
इसी के साथ बार्नियर अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाने वाले पहले प्रधानमंत्री भी बन गए थे।
संसद में बार्नियर की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया था। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 331 वोट पड़े, जो बहुमत से कहीं ज्यादा थे।
परिचय
कौन हैं फ्रांस्वा बायरू?
25 मई, 1981 को जन्में बायरू के पिता भी महापौर रहे हैं। बायरू 1993 से 1997 तक लगातार 3 बार शिक्षा मंत्री रहे।
वे 1999 से 2002 तक यूरोपीय संसद के सदस्य भी रहे और 2014 से महापौर हैं।
2007 में उन्होंने अपनी पार्टी MoDem बनाई थी।
वे 2002 , 2007 और 2012 का राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके हैं।
2017 में वे केवल 35 दिनों के लिए न्याय मंत्री भी रहे थे।
चुनौतियां
बायरू के सामने चुनौतियों का अंबार
बायरू के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पूर्ववर्तियों से ज्यादा समय तक पद पर बने रहने की है, क्योंकि फ्रांस में इस साल 3 प्रधानमंत्री पद छोड़ चुके हैं।
इसके अलावा फ्रांस के निचले सदन में किसी के भी पास बहुमत नहीं है। ऐसे में सबको साथ लेकर चलना और सरकार बचाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
विपक्षी पार्टियों ने संकेत दिया है कि वे एक और अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं।
राजनीतिक हलचल
फ्रांस में चुनावों के बाद से राजनीतिक अस्थिरता
दरअसल, फ्रांस की संसद का कार्यकाल 2027 में खत्म होना था, लेकिन यूरोपीय संसद के चुनावों में हार के बाद मैक्रों ने मध्यावधि चुनाव का ऐलान कर दिया था।
इसके बाद हुए नेशनल असेंबली के चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। इसके बाद से मैक्रों एक कमजोर गठबंधन वाली अल्पमत सरकार चला रहे हैं, जो अपने अस्तित्व के लिए विपक्षी नेता मरीन ले पेन की नेशनल रैली पर निर्भर है।