
यह गांव प्रवासी पक्षियों का है 'मायका', बच्चों की तरह ख्याल रखते हैं लोग
क्या है खबर?
अक्सर आपने लोगों को यह बात कहते हुए जरूर सुना होगा कि जो बात गांव में है वो शहर में नहीं।
ऐसा ही कुछ प्रवासी पक्षियों को भी लगता है। दरअसल, कोक्केरबेल्लुर नामक गांव प्रवासी पक्षियों का छह माह तक 'मायका' है, जिनका गांववाले बिल्कुल बेटियों की तरह ख्याल रखते हैं।
सुनने में भले ही यह बात अटपटी लगे, लेकिन यह शत-प्रतिशत सच है।
आइए जानें कि गांववालों ने पक्षियों को बेटियों का दर्जा क्यों दे रखा है।
जानकारी
कहां पर स्थित है ये अनोखा गांव?
कर्नाटक के मांडया जिले के कोक्केरबेल्लुर गांव के लोग प्रवासी पक्षियों को अपनी बेटियों की तरह मानते हैं।
जिस तरह बेटियां बच्चे के जन्म के लिए अपने मायके आती हैं, ठीक उसी तरह पेलिकन और पेंटेड स्टॉर्क जैसे प्रवासी पक्षी यहां आते हैं।
कोक्केरबेल्लुर में पेलिकन पक्षी अक्टूबर में आ जाते हैं और करीब छह महीने बाद यानी अप्रैल तक रहते हैं।
ठीक इसी प्रकार प्रवासी पक्षी पेंटेड स्टॉर्क भी दिसंबर से जुलाई तक इस गांव में रहते हैं।
रिश्ता
पक्षियों को शुभ मानते हैं गांव के लोग
जब इन पक्षियों के बच्चे उड़ना और भोजन जुटाना सीख जाते हैं तो ये पक्षी वापस चले जाते हैं।
पक्षियों और गांव वालों के बीच यह अद्भुत रिश्ता करीब 200 साल से बना हुआ है।
गांव के लोग इन पक्षियों को शुभ मानते हैं।
यहां तक की जब गांव के लोग शादी का रिश्ता जोड़ते हैं, तब ये जरूर देखते हैं कि जिस घर में उनके बच्चे का रिश्ता जुड़ रहा है, वहां पक्षियों के लिए घोंसला है या नहीं।
पक्षियों के लिए सुविधाएं
गांववालों के साथ-साथ प्रशासन भी रखता है इन पक्षियों का ख्याल
प्रवासी पक्षियों और इनके बच्चों को रहने के लिए प्रशासन और गांव के लोग विशेष इंतजाम करते हैं जैसे पेड़ से गिरकर इनके बच्चे घायल न हों, इसलिए पेड़ों के आसपास नेट लगाए जाते हैं।
कुछ साल पहले करंट से कई पक्षियों की मौत हो गई थी, इसलिए अब सभी बिजली की तारों को कवर कर दिया गया है।
आपको बता दें कि प्रवासी पक्षी भी गांव के लोगों के साथ रिश्ते को बखूबी निभाते हैं।
संबंध
ये पक्षी भी गांव के लोगों के साथ बखूबी निभाते हैं रिश्ता
जानकारी के मुताबिक, यह गांव कुछ समय पहले सिमसा नदी के तट पर स्थित था, लेकिन प्लेग की वजह से गांववालों ने अपनी जगह बदल ली, जिसके बाद प्रवासी पक्षी भी गांव वालों की नई जगह पर आकर रहने लगे।
बता दें कि पक्षियों का मुख्य भोजन मछली है, जिसके लिए अब उन्हें नदी तट तक उड़कर जाना पड़ता है।
इस गांव में आने वाले प्रवासी पक्षी भारत के अलावा श्रीलंका, कंबोडिया और थाईलैंड में पाए जाते हैं।