
मुंबई: अब सड़कों पर नहीं दौडेंगी ऐतिहासिक लाल डबल-डेकर बसें, देखें आखिरी यात्रा का वीडियो
क्या है खबर?
मुंबई की ऐतिहासिक लाल रंग की डबल-डेकर बसों की आज यानी 15 सितंबर को विदाई होने जा रही है।
ये बसें न केवल परिवहन का साधन थीं, बल्कि 1937 के दशक से शहर के अनूठे दृश्य की तलाश करने वाले पर्यटकों के लिए एक आकर्षण के रूप में भी काम करती आई हैं।
आज इन बसों की विदाई के लिए एक खास कार्यक्रम भी रखा गया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
डबल डेकर बसें
BEST ने मंगलवार को की थी घोषणा
मुंबई बिजली आपूर्ति और परिवहन (BEST) ने बीते मंगलवार को घोषणा की थी कि लाल डबल-डेकर बसों को इस सप्ताह सड़कों से हटा दिया जाएगा।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में ओपन टॉप डबल-डेकर बसें भी शहर से गायब हो जाएंगी।
ऐसे में जब मुंबई अपनी ऐतिहासिक लाल डबल-डेकर बसों को अलविदा कह रही है, मरोल डिपो की डीजल से चलने वाली डबल-डेकर बस की आखिरी यात्रा का वीडियो ऑनलाइन सामने आया है।
प्रतिक्रियाएं
वीडियो को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स ने साझा किए अपने अनुभव और प्रतिक्रियाएं
इंस्टाग्राम पर वायरलभयानी नामक अकाउंट से साझा की गई डबल-डेकर बस की आखिरी यात्रा का वीडियो देखकर लोग विभिन्न प्रतिक्रियाएं साझा कर रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा, 'अरे इसी बस के चक्कर में तो मैं मुंबई आया करता था।'
एक अन्य यूजर ने लिखा, 'मुझे यह बस देखकर अपने कॉलेज के दिन याद आ गए।'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'यह बस तो मुंबई की पहचान थी।'
कारण
लाल डबल-डेकर को क्यों बंद किया जा रहा है?
अब लाल डबल-डेकर बसों की जगह नई इलेक्ट्रिक बसें लेने वाली हैं।
डबल-डेकर बसों में डीजल का इस्तेमाल किया जाता है और डीजल बसों का जीवन 15 साल होता है, लेकिन ऐतिहासिक अहमियत के चलते इन्हें अब तक चलाया जा रहा था।
हालांकि, अब इनकी जगह इलेक्ट्रिक बसों को मुंबई की सड़कों पर दौड़ता हुआ देखा जाएगा। इसका कारण है कि इन बसों के रखरखाव में ज्यादा खर्च नहीं आता है।
खर्च
लाल डबल-डेकर बसों के रखरखाव में कितना खर्च आता है?
अंग्रेजों के जमाने से लाल डबल-डेकर बस मुंबई में चलती आ रही थीं और 90 के दशक की शुरुआत में BEST के बेड़े में लगभग 900 डबल-डेकर बसें हुआ करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या घटती गई।
इसका कारण इनका रखरखाव और डीजल का खर्च रहा। डीजल वाली एक डबल-डेकर बस पर 30-35 लाख रुपये खर्च होते थे।
इनकी तुलना में फरवरी से मुंबई में चलने वाली 25 इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों का खर्च 2 करोड़ रुपये होगा।