
इंडोनेशिया में अजीबोगरीब परंपरा, परिजन की मृत्यु होने पर काट दी जाती हैं महिलाओं की उंगलियां
क्या है खबर?
दुनियाभर की अलग-अलग संस्कृतियों में कई अजीबोगरीब परंपराएं हैं, जिनके अपने-अपने महत्व हैं।
इन्हीं में से इंडोनेशिया में निभाई जाने वाली एक परंपरा ऐसी है, जिसके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगे।
यहां पर एक जनजाति ऐसी है, जिसमें परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर महिलाओं की आधी उंगलियां काट दी जाती हैं। इस अजीबोगरीब परंपरा का नाम 'इकिपालिन' है।
आइये आज इस दर्दनाक परंपरा के पीछे की वजह जानते हैं।
जनजाति
किस जनजाति के लोग निभाते हैं ये दर्दनाक परंपरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परंपरा इंडोनेशिया में रहने वाले दानी जनजाति द्वारा निभाई जाती है।
दानी जनजाति के लोग लंबे समय से इस परंपरा को निभा रहे हैं।
इस जनजाति में जब भी किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उस परिवार की महिलाओं को यह परंपरा निभानी पड़ती है।
इसमें एक सदस्य की मृत्यु पर महिलाओं के हाथ की एक उंगली का आधा हिस्सा बेरहमी से काट दिया जाता है।
प्रक्रिया
क्या है उंगली काटने की प्रक्रिया?
इस परंपरा को निभाने के लिए सबसे पहले महिलाओं की उंगली को रस्सी से मजबूती से बांध दिया जाता है।
इससे उंगली में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और फिर कुल्हाड़ी से उंगली का आधा हिस्सा काट दिया जाता है।
इसके बाद कटी हुई उंगली को दफन कर दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है।
बता दें कि महिलाओं को इस दर्दनाक परंपरा से एक बार नहीं, बल्कि बार-बार गुजरना पड़ता है।
कारण
क्यों मनाई जाती है यह परंपरा?
दानी जनजाति के लोगों का मानना है कि उंगली काटने की प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को जो दर्द महसूस होता है, उससे मृतक के दर्द को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही उनके पैतृक की आत्मा को शांति भी मिलती है।
हालांकि, मरने वाले व्यक्ति का दर्द कम करने की जिम्मेदारी पुरुषों पर बिल्कुल भी नहीं है। यह जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ महिलाओं के कंधों पर होती है। उन्हें अकेले ही इससे गुजरना पड़ता है।
सरकार
परंपरा को खत्म करने के लिए सरकार क्या कर रही है?
दानी जनजाति द्वारा निभाई जाने वाली यह परंपरा, परंपरा कम बल्कि महिलाओं के प्रति अत्याचार ज्यादा लगता है।
हालांकि, कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने इस परंपरा को भयानक और बर्बर बताते हुए कई बार इसका विरोध किया है।
इसके परिणामस्वरूप अब देश की सरकार सतर्क हो गई है और इस परंपरा को खत्म करने के लिए कदम उठा रही है।
कुछ लोगों का मानना है कि यह परंपरा पहले की तुलना में अब काफी कम भी हो गई है।