
क्या है क्लाउड गेमिंग, कैसे काम करती है ये तकनीक?
क्या है खबर?
गेमिंग की दुनिया में दशकों से सोनी प्लेस्टेशन और माइक्रोसॉफ्ट एक्सबॉक्स आदि का दबदबा रहा है।
अब टेक कंपनियां भारी कंसोल और फिजिकल सेटअप के जरिए होने वाली गेमिंग को सब्सक्रिप्शन और वर्चुअल एक्सेस वाली गेमिंग की तरफ शिफ्ट करने में लगी हैं।
हाल ही में ब्रिटेन के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर ने गेमिंग से जुड़े माइक्रोसॉफ्ट की एक्टिविजन की खरीद को रोक दिया क्योंकि इसमें "क्लाउड गेमिंग" को प्रभावित करने की क्षमता थी।
जान लेते हैं क्या है क्लाउड गेमिंग।
इंटरनेट
गेम सेटअप खरीदने की जगह मासिक भुगतान के जरिए गेमिंग करना संभव
हाई-स्पीड इंटरनेट आने से पहले तक गेमिंग के दीवानों के लिए महंगा फिजिकल सेटअप ही एकमात्र उपाय था।
4G, 5G और ब्रॉडबैंड की तेज इंटरनेट स्पीड ने कंपनियों को गेमिंग की नई टेक्नोलॉजी विकसति करने और उसके जरिए कमाई करने के नए रास्ते खोले हैं।
अब गेम कैसेट और सेटअप खरीदने की बजाय सिर्फ मासिक भुगतान के जरिए गेम खेलना संभव है।
इससे कंपनियों के लिए भी गेमिंग हार्डवेयर के खर्च को बचाना और मुनाफा बढ़ाना आसान हुआ है।
गेमिंग
क्लाउड गेमिंग को ऐसे समझें
क्लाउड गेमिंग के जरिए गेम खेलने के लिए गेमर्स को कंसोल, गेमिंग हार्डवेयर, गेम कैसेट आदि की जरूरत नहीं होती है। इसके लिए सिर्फ मोबाइल या कंप्यूटर होना चाहिए।
गेम क्लाउड सर्वर पर होता है, जहां से उसे ऐप या सॉफ्टवेयर के जरिए एक्सेस करके खेला जा सकता है।
उदाहरण के लिए, पहले लोगों को गाना सुनने के लिए एक मशीन, कैसेट और CD की जरूरत होती थी, लेकिन अब सिर्फ एक ऐप के जरिए गाने सुने जा सकते हैं।
चार्ज
बढ़ रही है क्लाउड गेमिंग
डाटा एनालिसिस फर्म न्यूजू के मुताबिक 3 अरब से ज्यादा गेमर्स में से करीब 3 करोड़ से ज्यादा पिछले साल क्लाउड गेमिंग के लिए चार्ज दे रहे थे।
क्लाउड गेमिंग को लेकर हरग्रेव्स लैंसडाउन की विश्लेषक सुसन्नाह स्ट्रीटर ने अनुमान जताया कि ये सालाना लगभग 40 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
वहीं ब्रिटेन के एंटीट्रस्ट रेगुलेटर ने कहा कि 2021 और 2022 के बीच देश में नियमित क्लाउड गेमर्स की संख्या 3 गुना से अधिक हो गई थी।
अंतर
क्लाउड गेमिंग के फायदे
पुराने गेमिंग हार्डवेयर पर आधारित गेमिंग और क्लाउड के जरिए होने वाले गेमिंग में एक मुख्य अंतर इंटरनेट का है। क्लाउड गेमिंग के लिए हाई-स्पीड इंटरनेट जरूरी है, जबकि प्लेस्टेशन और एक्सबॉक्स आदि में गेमिंग के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होती।
प्लेस्टेशन और एक्सबॉक्स भारी-भरकम सेटअप होते हैं और इसलिए इन्हें कहीं ले जाना आसान नहीं है।
दूसरी तरफ क्लाउड गेमिंग में स्मार्टफोन और लैपटॉप के जरिए कभी भी और कहीं भी आसानी से गेमिंग करना संभव है।
क्लाउड
रेस में पिछड़ी गूगल
विशेषज्ञों को क्लाउड गेमिंग सेक्टर में किसी भी तरह से भारी गिरावट की उम्मीद नहीं है।
हालांकि, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के जोस्ट रिटवेल्ड ने बताया कि क्लाउड गेमिंग अभी भी बड़े गेम इंडस्ट्री का एक छोटा हिस्सा है।
गेमिंग से जुड़ी बड़ी कंपनियों में सोनी, माइक्रोसॉफ्ट के अलावा NVIDIA और निन्टेंडो भी हैं।
गूगल ने भी गेमिंग साम्राज्य बनाने के लिए 2019 में स्टाडिया लॉन्च किया था, लेकिन ये 3 साल से भी कम समय में बंद हो गया।
जानकारी
मुश्लिक में अमेजन लूना
ई-कॉमर्स के साथ ही क्लाउड सर्विस की दिग्गज कंपनी अमेजन ने भी गेमिंग के लिए 2020 में अपना अमेजन लूना पेश किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन लूना भी कई मुश्किलों से जूझ रही है।