
#NewsBytesExplainer: 200 साल पहले बना सैजिटेरियस ए स्टार, जानें क्या होते हैं ब्लैक होल
क्या है खबर?
नासा के इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर (IXPE) टेलिस्कोप के नए निष्कर्षों के अनुसार, आकाशगंगा के केंद्र में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल सैजिटेरियस ए स्टार लगभग 200 साल पहले सक्रिय हो गया था।
पृथ्वी से 25,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित यह ब्लैक होल धरती का सबसे निकटतम सुपरमैसिव ब्लैक होल है और इसका द्रव्यमान सूर्य से लाखों गुना अधिक होने का अनुमान है।
ब्लैक होल शक्तिशाली ब्रह्मांडीय वस्तुएं हैं, जो अपने आसपास घूमने वाली हर चीज को नष्ट कर देती हैं।
रहस्य
एक्स-रे विस्फोट से हुई थी चमक
ब्लैक होल का रहस्य वर्षों से खगोल वैज्ञानिकों के लिए जिज्ञासा का विषय है।
शुरुआत में शोधकर्ताओं ने देखा कि आकाशगंगा (मिल्की वे) के केंद्र में मौजूद विशाल तारा निर्मित गैसीय बादल एक्स-रे में काफी ज्यादा चमक रहे थे। इतनी चमक की उम्मीद नहीं थी।
यह एक्स-रे सिग्नल स्वयं गैसीय क्षेत्रों से उत्पन्न नहीं हुआ था बल्कि सैजिटेरियस ए स्टार ब्लैक होल से एक्स-रे विस्फोट के बाद इन बादलों पर रिफ्लेक्शन का परिणाम था।
सबूत
वैज्ञानिक मूल चमक को मानते हैं 200 साल पहले की घटना
IXPE टेलीस्कोप के जरिए वैज्ञानिकों ने अपने सिद्धांत के लिए सूबत जुटाए हैं।
उनका मानना है कि सैजिटेरियस ए स्टार ने ब्रह्मांडीय सामग्री को निगल लिया, जिससे एक्स-रे की एक तेज चमक निकली। यह चमक बाद में ब्लैक होल के करीब मौजूद गैस के बादलों द्वारा रिफ्लेक्ट हुई।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मूल चमक 200 साल पहले की घटना थी। ए स्टार अपने निकट घूमने वाले किसी भी ब्रह्मांडीय पदार्थ को निगल जाता है और एक्स-रे उत्सर्जित करता है।
जानकारी
ब्लैक होल में गिर जाता है मलबा
कई तारे और गैसीय बादल खतरनाक तरीके से सैजिटेरियस ए स्टार के करीब घूमते रहते हैं और उनमें से किसी को इस विशाल ब्लैक होल ने पकड़ लिया होगा और निगल गया होगा। इसका मलबा सीधे ब्लैक होल में गिर जाता है।
नासा
एक्स-रे ध्रुवीकरण को माप सकता है IXPE टेलीस्कोप
नासा का IXPE टेलीस्कोप एक्स-रे ध्रुवीकरण को माप सकता है, जो तब होता है, जब ब्लैक होल ब्रह्मांडीय सामग्री को खा जाते हैं।
एक वेबसाइट के मुताबिक, ध्रुवीकरण से तात्पर्य एक विशेष दिशा में प्रकाश तरंगों के दोलन से है, जिससे यह जानकारी मिल सकती है कि प्रकाश कैसे उत्पन्न हुआ और रिफ्लेक्ट हुआ।
IXPE की मदद से शोधकर्ताओं ने पाया कि एक्स-रे सिग्नल्स का ध्रुवीकरण कोण सैजिटेरियस ए स्टार की दिशा की तरफ इंगित करता है।
कंपास
कंपास की तरह काम करता है ध्रुवीकरण कोण
रोम में इटालियन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के खगोल वैज्ञानिक रिकार्डो फेराजोली ने कहा कि ध्रुवीकरण कोण एक कंपास की तरह काम करता है। ये रोशनी के रहस्यमय और लंबे समय से चले आ रहे स्त्रोत की ओर इशारा करता है।
IXPE की मदद से देखे गए एक्स-रे सिग्नल्स के ध्रुवीकरण कोण जिस दिशा में इशारा कर रहे हैं, उधर सैजिटेरियस ए स्टार के अलावा कुछ नहीं है। वर्तमान में सैजिटेरियस ए स्टार निष्क्रिय है।
जानकारी
यह पता लगाना चाहते हैं शोधकर्ता
शोधकर्ता इस ब्लैक होल को लेकर आगे की जांच में यह पता लगाने के लिए शोध करना चाहते हैं कि कौन सी भौतिक प्रक्रियाएं अब इस निष्क्रिय ब्लैक होल को फिर से जगाने में सक्षम होंगी।
अंत
क्या है ब्लैक होल?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब कोई विशाल तारा अपने अंत की ओर पहुंचता है तो वह अपने ही भीतर सिमटने लगता है और धीरे-धीरे वह भारी भरकम ब्लैक होल बन जाता है। ब्लैक होल बनने के बाद ये सब कुछ अपने में समेटने लगता है।
ब्लैक होल आकाशगंगाओं के केंद्र में होते हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि यह स्पेस में वह जगह है, जहां भौतिक का कोई नियम काम नहीं करता। यहां गुरुत्वाकर्षण और अंधकार है।
जानकारी
प्रकाश को भी निगल जाता है ब्लैक होल
ब्लैक होल की गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी ज्यादा होती है कि यह सितारों के साथ ही प्रकाश को भी निगल जाते हैं। ये जब सितारों को निगलते हैं, तब बाहर की तरफ तेज रोशनी निकलती है।
प्रकार
कई तरह के होते हैं ब्लैक होल
ब्लैक होल कई प्रकार होते हैं, इनमें सुपरमेसिव ब्लैक होल और अल्ट्रा मेसिव ब्लैक होल होते हैं।
अल्ट्रामेसिव ब्लैक होल सबसे बड़े आकार के होते हैं और इनका द्रव्यमान 10 अरब सूरज से भी ज्यादा माना जाता है।
मिल्की वे जैसी आकाशगंगाओं के केंद्र में पाए जाने वाले सुपर मेसिव ब्लैक होल के मुकाबले अल्ट्रामेसिव ब्लैक होल काफी बड़े होते हैं।
ब्रह्मांड में कई ब्लैक होल हैं और कई की अभी खोज भी नहीं हो पाई है।
सक्रिय
सक्रिय अवस्था वाले ब्लैक होल का लग जाता है पता
अधिकांश ब्लैक होल जिनके बारे में जानकारी उपलब्ध है, वे सक्रिय अवस्था में होते हैं। यही ब्लैक होल तारों आदि को खींचते हैं, जिनसे प्रकश, एक्स रे आदि पैदा होता है और इनके आवरण को विशेष चमक देते हैं। इसी चमक से टेलिस्कोप आदि की मदद से इनकी उपस्थिति का पता चलता है।
निष्क्रिय ब्लैक होल को देख पाना लगभग असंभव होता है। इनके आसपास कुछ घटित नहीं होता है तो इनकी उपस्थिति का भी पता नहीं चल पाता।
जानकारी
निष्क्रिय ब्लैक होल की इस तरह होती है पहचान
निष्क्रिय ब्लैक होल की पहचान केवल ग्रैविटेशनल लेंसिंग से ही संभव हो पाती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि निष्क्रिय ब्लैक होल ब्रह्मांड के निर्माण की शुरुआत में ही बने थे और बाद में एक-दूसरे में विलय होकर बड़े होते गए।