
चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले के 20 मिनट हैं चुनौतीपूर्ण, इसी दौरान सबसे ज्यादा डर
क्या है खबर?
चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम रोवर प्रज्ञान के साथ सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास कर इतिहास रचने के लिए तैयार है।
लैंडर 23 अगस्त, 2023 को चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा।
इसकी लैंडिंग के दौरान के आखिरी 20 मिनट सबसे चुनौतीपूर्ण होने के साथ ही डर और रोमांच से भरे होंगे।
बेंगलुरू सेंटर की कमांड पर विक्रम लैंडर 25 किमी की ऊंचाई से चांद की सतह की तरफ उतरना शुरू कर देगा।
वेग
लैंडर 6,048 किलोमीटर प्रति घंटे के वेग से बढ़ेगा सतह की तरफ
लैंडर 1.68 किलोमीटर प्रति सेकेंड के वेग से चांद की सतह की तरफ बढ़ना शुरू करेगा, जो लगभग 6,048 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह एक हवाई जहाज के वेग से लगभग 10 गुना है।
इसके बाद विक्रम लैंडर के सभी इंजन चालू हो जाएंगे, जो लैंडर को निर्धारित गति से नीचे उतारेंगे।
लैंडर अभी भी हॉरिजॉन्टल (क्षैतिज) स्थिति में होगा। इसे 'रफ ब्रेकिंग चरण' कहा जाता है, जो लगभग 11 मिनट तक रहता है।
सर्वे
लैंडर को वर्टिकल स्थिति में लाकर कराई जाएगी लैंडिंग
विक्रम लैंडर को चांद की सतह पर वर्टिकल (लंबवत) स्थिति में लाया जाएगा और इसके साथ ही 'फाइन ब्रेकिंग चरण' शुरू होगा।
चंद्रयान-2 का लैंडर जब कंट्रोल से बाहर होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था तो उस समय भी वह ठीक ब्रेकिंग चरण में था।
चांद की सतह से 800 मीटर ऊपर हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल दोनों ही वेग शून्य हो जाते हैं। यहां विक्रम लैंडर चांद की सतह के ऊपर मंडराता है और लैंडिंग स्ट्रिप का सर्वे करता है।
खतरा
लैंडिंग साइट की खोज करेगा लैंडर
खतरे का पता लगाने और बेहतर लैंडिंग साइट की खोज के लिए तस्वीरें लेने के लिए विक्रम लैंडर एक बार फिर 150 मीटर पर रुकने के लिए नीचे जाता है।
इसके बाद यह केवल 2 इंजनों की फायरिंग के साथ चांद की सतह को छुएगा और इसके पैरों (लैंडिंग लेग) को अधिकतम 3 मीटर प्रति सेकेंड या लगभग 10.8 किलोमीटर प्रति घंटे का वेग संभालने के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं।
लैंडर
लैंडर के पैर चांद की सतह पर पड़ते ही खत्म होगा खतरा
लैंडर के पैरों पर लगे सेंसर चांद की सतह को जैसे ही छुएंगे तो लैंडर के इंजन बंद हो जाएंगे और इसी के साथ 20 मिनट का चुनौतीपूर्ण समय समाप्त हो जाएगा।
लैंडिंग के दौरान उड़ने वाली रेजोलिथ (चांद पर मौजूद धूल) के छंटने के बाद लैंडर का रैंप खुल जाएगा।
इसी रैंप से रोवर प्रज्ञान धीरे-धीरे लुढ़कता हुआ बाहर आएगा। इसके बाद रोवर चांद की सतह के चारों तरफ घूमने के लिए स्वतंत्र हो जाता है।
तस्वीर
2 सप्ताह तक काम करेंगे लैंडर और रोवर
इसके बाद बड़ा पल वह आएगा, जब विक्रम लैंडर रोवर की तस्वीरें लेगा और चांद की सतह से पहली तस्वीर धरती पर भेजी जाएगी।
इसके बाद सौर ऊर्जा से संचालित लैंडर और रोवर दोनों 1 लूनर डे तक आगे के मिशनों को अंजाम देंगे।
चांद का 1 लूनर डे पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है यानी लैंडर और रोवर 2 सप्ताह तक काम करने के लिए बनाए गए हैं।