
भारत में एलन मस्क के स्टारलिंक को कुइपर प्रोजेक्ट से टक्कर देने की तैयारी में अमेजन
क्या है खबर?
इंटरनेट उपलब्ध कराने की टेक्नोलॉजी अब मोबाइल टावर और फाइबर केबल से आगे निकल गई है। अब सैटेलाइट और लेजर के जरिए इंटरनेट मिल रहा है। कई देशों में ये सुविधाएं शुरू हैं।
एलन मस्क की स्पेस-X स्टारलिंक के जरिए पहले से ही लगभग 40 देशों में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस दे रही है। अब अमेजन की तरफ से भी कुइपर नाम से सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने की खबर है।
भारत में स्टारलिंक के आने पर कुइपर से उसका मुकाबला होगा।
कुइपर
1,000 लोग कुइपर प्रोजेक्ट पर कर रहे हैं काम
गैजेट्स 360 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन के कुइपर प्रोजेक्ट पर अभी 1,000 लोग काम कर रहे हैं और इसे भारत लाने पर भी कंपनी काम कर रही है। भारत में इसका मुकाबला स्टारलिंक से होगा। हालांकि, भारत में स्टारलिंक की सर्विस भी अभी शुरू नहीं हुई है।
इस साल की शुरुआत में ही अमेजन ने सैटेलाइट इंटरनेट की जानकारी दी थी। कंपनी ने कहा था कि प्रतिद्वंदियों की तुलना में उसके डिजाइन छोटे, किफायती और अधिक सक्षम हैं।
सैटेलाइट
2 प्रोटोटाइप सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है कंपनी
रिपोर्ट में प्रोजेक्ट कुइपर के निदेशक नवीन काचरू के हवाले से बताया गया है कि कंपनी अभी अपने 2 प्रोटोटाइप सैटेलाइट को लॉन्च करने की तैयारी में है।
उन्होंने बताया कि यह उनका पहला ऑर्बिटल मिशन है।
काचरू के मुताबिक, बाकी टीम प्रोडक्शन सैटेलाइट्स का निर्माण कर रही हैं और उन्हें 2024 में लॉन्च किया जाएगा।
स्टारलिंक से मुकाबले के एक सवाल में उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कम कीमत में हाई-क्वालिटी सर्विस देना है।
उपलब्धता
सभी की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है नेटवर्क- काचरू
काचरू ने एक बात और कही कि वह इसे सभी के लिए उपलब्ध कराना चाहते हैं।
उन्होंने बताया, "घरों, स्कूलों, अस्पतालों, व्यवसायों और सरकारी उपयोग के हिसाब से हमने इसे फ्लेक्सिबल सॉफ्टवेयर नेटवर्क के रूप में डिजाइन किया है।"
उनके मुताबिक, यह 5G नेटवर्क जैसा दिखता है, लेकिन इसे विभिन्न तरह के ट्रैफिक के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, कंपनी अपने इस प्रोजेक्ट को लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न ऑपरेटर के साथ साझेदारी करेगी।
जानकारी
50 प्रतिशत सैटेलाइट समूहों को लॉन्च करने के बाद होगा व्यापक नेटवर्क कवरेज
काचरू के मुताबिक, पूरी धरती पर इंटरनेट सर्विस देने के लिए उन्हें 50 प्रतिशत सैटेलाइट समूहों को जून 2026 तक डिप्लॉय करने की जरूरत होगी। इसके बाद कंपनी के पास +/- 56 डिग्री के बीच कवरेज क्षमता होगी।
असवर
भारत को बताया महत्वपूर्ण अवसर
कुइपर प्रोजेक्ट को भारत में शुरू किए जाने के बारे में काचरू ने कहा कि भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका उनके लिए शानदार बाजार हैं और यहां उनके लिए बेहतरीन अवसर है।
उन्होंने कहा, "भारत में हम सरकार के साथ काम कर रहे हैं और संभावित भागीदारों के साथ भी काम कर रहे हैं। अभी हम कुछ घोषणा नहीं कर सकते हैं, लेकिन भारत हमारे लिए महत्वपूर्ण अवसर है।"
इंस्टालेशन
इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया है आसान
इसके इंस्टॉलेशन सिस्टम के बारे में काचरू ने बताया कि देश और क्षेत्र के आधार पर कंपनी सिस्टम को खुद से इंस्टॉल करने और कंपनी की तरफ से इंस्टॉल किए जाने दोनों तरह की सर्विस देगी।
कुइपर के पैकेज में आउटडोर एंटीना, इनडोर यूनिट, वाई-फाई राउटर, केबल और माउंट मिलेगा। इसके बाहरी एंटीना को कहीं स्थापित करके आसमान की तरफ कर देना है और इसकी केबल को राउटर में लगाने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है।