
बच्चों में सकारात्मक सोच का विकास करना चाहते हैं तो इन टिप्स की लें मदद
क्या है खबर?
अगर सोच सकारात्मक रखी जाए तो जीवन के नए-नए मोड़ का सामना करने की हिम्मत खुद ही मिल जाती है।
आमतौर पर जब भी जीवन में थोड़ी सी भी बुरी परिस्थिति आती है तो लगभग हर कोई निराशावादी हो जाता है। ऐसा ही कुछ बच्चों के साथ भी होता है।
इसलिए बेहद जरूरी है कि बच्चों के भीतर बचपन से ही सकारात्मक सोच का संचार किया जाए ताकि जीवन की हर स्थिति को वे खुद संभाल सकें।
#1
भावना व्यक्त करना सिखाएं
बच्चों में सकारात्मकता सोच का संचार करने का आसान और महत्वपूर्ण तरीका है कि आप उन्हें अपनी भावना को व्यक्त करना सिखाएं। फिर भले ही वह उदासी हो या खुशी, भय हो या चिंता।
ये सभी व्यक्ति के मन के सामान्य भाव है और जब बच्चे अपनी भावना को व्यक्त करना सीख जाता है तो इससे उनके जीवन में नकारात्मकता के लिए कोई जगह नहीं होगी।
इसके अतिरिक्त इससे बच्चा अपनी समस्याओं का हल खुद निकालने की कोशिश कर पाएगा।
#2
बनें प्रेरणास्रोत
यह बात बिल्कुल सच है कि बच्चों के सबसे पहले शिक्षक उनके माता-पिता ही होते हैं। इसलिए आप चाहें मुंह से कुछ भी कहें लेकिन उस बात को अपने जीवन में नहीं उतारते तो आपके बच्चे भी उन मूल्यों को कभी नहीं अपना पाएंगे।
इस कारण सबसे पहले आप अपने जीवन में सकारात्मकता का हाथ थामे। फिर धीरे-धीरे बच्चा आपको देखकर ऐसा ही करने लगेगा क्योंकि बच्चों पर सामने हो रही चीजों का काफी प्रभाव पड़ता है।
#3
बच्चों को समय-समय पर करते रहें प्रेरित
बच्चों में सकारात्मक सोच का विकास करने के लिए एक तरीका यह भी है कि आप उन्हें समय-समय उनको प्रेरिक करते रहें।
जब वे किसी चीज में सफल हो जाएं तो उनकी सराहना करें और अगर वे गलतियां करते हैं तो उन्हें डांटें नहीं बल्कि उन्हें यह समझाएं कि उन्हें अपनी गलतियों से सीखना है और उसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
साथ ही उन्हें बताएं कि हर गलती या बुरा वक्त एक अच्छी सीख देकर जाता है।
#4
सही दोस्तों का साथ होना जरूरी
जीवन में दोस्तों का भी अच्छा खासा प्रभाव पड़ता है। इसलिए बच्चों में सकारात्मक सोच का संचार करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप उनके दोस्तों पर भी गहरी नजर रखें ताकि वक्त रहते हुए आप अपने बच्चों को सही और गलत का फर्क बता सकें।
साफ शब्दों में समझाए तो आपको यह पता होना चाहिए कि आपके बच्चे के दोस्त कैसे हैं क्योंकि जब उनके आसपास सकारात्मकता होगी तब वे खुद भी सकारात्मक सोचना शुरू कर देगें।