
केंद्र सरकार को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने फैक्ट चेक यूनिट पर रोक लगाई
क्या है खबर?
केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। कोर्ट ने सरकार की फैक्ट चेक यूनिट (FCU) पर रोक लगा दी है।
इस संबंध में कल (20 मार्च) को ही सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा होगा।
बता दें कि इस FCU का काम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार के बारे में 'फर्जी' और 'भ्रामक' सामग्री की जांच करना था।
फैक्ट चेक यूनिट
क्या है फैक्ट चेक यूनिट?
फैक्ट चेक यूनिट सरकार की तरफ से फर्जी और भ्रामक जानकारी को चेक करने का काम करेगी।
ये यूनिट फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार से जुड़ी पोस्ट को फेक या गलत बता सकती है।
FCU की शिकायत पर प्लेटफॉर्म को उस कंटेंट या पोस्ट को हटाना होगा और इंटरनेट से उसका यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (URL) भी हटाना होगा।
इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में संशोधन किए गए थे।
टिप्पणी
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमों को चुनौती गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाती है।
कोर्ट ने कहा, "2023 में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित नियम का भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर प्रभाव को विश्लेषण के लिए रखा था। 20 मार्च, 2024 की सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने की जरूरत है। भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी पर नियम के असर का हाई कोर्ट की ओर से विश्लेषण करने की जरूरत होगी।"
बॉम्बे हाई कोर्ट
बॉम्बे हाई कोर्ट ने रोक लगाने से किया था इनकार
पहले ये मामला बॉम्बे हाई कोर्ट गया था। तब न्यायाधीश जीएस पटेल ने संशोधन के विरोध में और न्यायाधीश नीला गोखले ने पक्ष में फैसला दिया था।
खंडित फैसला आने के बाद मामला तीसरे न्यायाधीश चंदूरकर के पास गया था और उन्होंने रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद सरकार ने 20 मार्च को FCU के गठन की अधिसूचना जारी कर दी, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं का क्या कहना है?
IT नियमों में संशोधन के खिलाफ स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन ने याचिका दायर की थी।
इन्होंने तर्क दिया कि FCU अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार पर हमला करता है। FCU यह तय करने के लिए सरकार के विवेक पर निर्भर नहीं हो सकता कि क्या गलत है या क्या नहीं।
याचिकाकर्ताओं ने FCU की अधिसूचना के समय पर भी सवाल उठाए थे।
तर्क
मामले पर सरकार ने क्या तर्क दिए?
सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "यह केवल सरकारी व्यवसाय तक ही सीमित है जैसा कि संवैधानिक अर्थों में समझा जाता है। यदि कोई प्रधानमंत्री की आलोचना करता है तो वो इसके अंतर्गत नहीं आएगा।"
मेहता ने उदाहरण देते हुए समझाया, "एक फर्जी फेसबुक पोस्ट थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश ने लोगों से सड़कों पर विरोध करने को कहा था। ऐसे पोस्ट पर प्लेटफॉर्म को अस्वीकरण लगाना होगा कि यह जानकारी गलत है।"