
इस्लामी सहयोग संगठन ने फिर दिया जम्मू-कश्मीर पर विवादित बयान, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
क्या है खबर?
इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) ने एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर पर बयान जारी करते हुए इलाके में जारी परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
इसका जवाब देते हुए भारत सरकार ने OIC के बयान को अनुचित बताया है। सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए भारत ने कहा कि OIC को एक देश के इशारे पर भारत के खिलाफ बयान देने से बचना चाहिए।
बयान
OIC ने क्या कहा था?
हाल ही में जारी किए गए अपने एक बयान में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन पर सवाल उठाते हुए OIC ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर की चुनावी सीमाओं को बदलने के भारत के प्रयासों पर गहरी चिंता व्यक्त करता है।
उसने भारत सरकार पर राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने और कश्मीरियों के अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया था।
इससे पहले पाकिस्तानी संसद ने भी जम्मू-कश्मीर में परिसीमन को खारिज करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
प्रतिक्रिया
भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी?
OIC के इस बयान का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "हम निराश हैं कि OIC सचिवालय ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मामलों पर अनुचित टिप्पणी की है... भारत सरकार केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पर OIC सचिवालय के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करती है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। OIC को एक देश के इशारे पर भारत के खिलाफ अपना सांप्रदायिक एजेंडा चलाने से बचना चाहिए।"
अन्य बयान
पहले भी आपत्तिजनक बयान दे चुका है OIC
बता दें कि OIC पहले भी कई बार पाकिस्तान के इशारे पर जम्मू-कश्मीर पर आपत्तिजनक बयान दे चुका है। पिछले साल कश्मीर पर बयान जारी करते हुए उसने कहा था कि यहां के लोगों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
इस फरवरी में उसने भारत में मुस्लिमों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर भी चिंता व्यक्त की थी और बयान जारी कर कहा था कि भारत में मुस्लिमों के नरसंहार का आह्वान किया जा रहा है।
इस्लामी सहयोग संगठन
क्या है OIC?
OIC 57 देशों का एक वैश्विक संगठन है और इसके सारे सदस्य मुस्लिम बहुल देश हैं। संगठन की स्थापना 1969 में हुई थी और यह खुद को 'मुस्लिम समाज की सामूहिक आवाज' के तौर पर परिभाषित करता है।
संगठन के माध्यम से इस्लामी देश मुस्लिम समुदाय से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है। पाकिस्तान भी इसका सदस्य है।
परिसीमन
क्या है जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का मुद्दा?
5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और इसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के कारण यहां परिसीमन किया जा रहा है।
परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को तय किया जाता है।
परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी रिपोर्ट जारी कर दी है। उसने जम्मू में विधानसभा सीटों की संख्या 37 से बढ़ाकर 43 और कश्मीर में 46 से बढ़ाकर 47 करने की सिफारिश की है।