
पंजाब: पठानकोट सैन्य अड्डे के गेट पर ग्रेनेड से हमला
क्या है खबर?
पंजाब के पठानकोट में सैन्य अड्डे के बाहर ग्रेनेड का धमाका होने की खबर है। ये धमाका कल रात हुआ और इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है।
इस संवेदनशील इलाके में धमाके से सेना और पुलिस सतर्क हो गए हैं और पुलिस के सभी शीर्ष अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
आसपास लगे CCTV कैमरों की मदद से ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमाका कैसे हुआ।
रिपोर्ट
बाइक सवार हमलावरों ने गेट के बाहर फेंका ग्रेनेड- रिपोर्ट
हिंदी अखबार अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, धमाका रविवार रात 1 बजे सैन्य अड्डे के त्रिवेणी गेट पर हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ अज्ञात बाइक सवार हमलावर काठ वाला पुल से धीरा जाने वाली सड़क के जरिए आए और गेट के बाहर ग्रेनेड फेंक कर भाग गए।
धमाके के समय गेट पर ड्यूटी दे रहे जवान थोड़ी दूरी पर थे, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
हमलावर कौन थे, ये पता लगाने की कोशिश जारी है।
संदिग्ध गतिविधियां
पठानकोट में सैन्य पोस्ट के पास देखा गया था ड्रोन
बता दें कि पठानकोट में पिछले कुछ महीनों में कई बार संदिग्ध गतिविधियां देखी जा चुकी हैं। 6 अक्टूबर को बामियाल सेक्टर की जैतपुर पोस्ट के पास एक ड्रोन देखा गया था। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सतर्क जवानों ने ड्रोन को देखते ही इस पर फायरिंग कर दी जिसके बाद ये ड्रोन गायब हो गया।
इससे पहले जुलाई में सुरक्षा बलों को पठानकोट में एक संदिग्ध गुब्बारा मिला था।
अन्य हमला
जम्मू में ड्रोन के जरिए हुआ था सैन्य हवाई अड्डे पर हमला
पठानकोट में ये संदिग्ध गतिविधियां ऐसे समय पर हुई थीं जब जम्मू हवाई अड्डे पर ड्रोन से हमले के बाद सभी सैन्य अड्डों पर हाई अलर्ट था।
इस हवाई अड्डे पर जून के अंत में दो ड्रोन्स के जरिए विस्फोटक गिराए गए थे। इस हमले में दो वायुसैनिकों को मामूली चोटें आई थीं। एक धमाके से एक इमारत की छत को नुकसान पहुंचा था, वहीं दूसरा धमाका खाली जगह पर हुआ था।
ये हमला आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने कराया था।
हमला
पठानकोट हवाई अड्डे पर भी हो चुका है हमला
बता दें कि पठानकोट स्थित वायु सेना के हवाई अड्डे पर भी 2016 में आतंकी हमला हो चुका है। इस हमले में सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे और छह आतंकी मारे गए थे।
पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ये हमला करवाया था और इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ था।
इस हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में फिर से दरार आ गई थी और एक के बाद एक हमलों के कारण ये दरार फिर कभी नहीं भरी।