
दिल्ली अग्निकांड: पीड़ितों ने आग में रहते हुए घर किए फोन, एक बोला- मरने वाला हूं
क्या है खबर?
रविवार को दिल्ली के अनाज मंडी की इमारत में लगी आग में मारे गए 43 लोगों के अंतिम समय की दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं।
मरने वालों में कम से कम पांच नाबालिग थे जो मजदूरी के लिए दिल्ली आए थे।
कुछ पीड़ितों ने आग लगने के बाद अपने जानने वालों को कॉल भी किया था। ऐसी ही एक कॉल में एक पीड़ित ने कहा था कि वो मरने वाला है और भागने का कोई रास्ता नहीं है।
अनाज मंडी अग्निकांड
आग लगने के समय सो रहे थे अधिकांश पीड़ित
रविवार तड़के दिल्ली के अनाज मंडी स्थित चार मंजिला इमारत में आग लग गई थी।
इमारत में ज्यादातर झारखंड और बिहार से आए मजदूर रहते थे और जिस समय आग लगी उनमें से अधिकांश सो रहे थे।
इमारत से बाहर निकलने के लिए केवल एक पतला सा रास्ता था, जबकि दूसरा रास्ता कच्चे माल से बंद हो रखा था।
इसके अलावा वेंटिलेशन भी नहीं था जिसके कारण पीड़ितों के पास बाहर निकलने का मौका बेहद कम था।
जानकारी
इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग
पुलिस के अनुसार, इमारत में गैरकानूनी निर्माण कार्य होता था और आग संभवत: दूसरी मंजिल पर एक इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट से लगी। ये आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई और सोते हुए लोग मौत के गाल में समा गए।
नाबालिग पीड़ित
मरने वालों में 13 वर्षीय महबूब भी शामिल
घटना में मरने वाले 43 लोगों में बिहार के समस्तीपुर से आया 13 वर्षीय महबूब भी शामिल है।
वो छह महीने पहले ही दिल्ली आया था और इमारत की दूसरी मंजिल पर 500 रुपये प्रति महीने के किराए पर रहता था।
महबूब के संबंधी मोहम्मद हकीम ने बताया कि वो अभी भी ट्रेनिंग पर था और उसे नियमित वेतन नहीं मिलता था। महबूब खाने के लिए कभी-कभी ढाबे पर जाया करता था।
गरीबी
बेहद गरीब है महबूब का परिवार
हकीम ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कोई भी काम नहीं करना चाहता, लेकिन महबूब के पास इसके अलाव कोई भी चारा नहीं था।
उन्होंने बताया, "उसका परिवार बहुत गरीब है। उसके पिता बिहार में मजदूर के तौर पर काम करते हैं। परिवार को लगा कि काम करना उसे मजबूत बनाएगा।"
हकीम ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में रखे शवों में महबूब के शव की पहचान उसके फोन पर आधार कार्ड की मदद से की।
अन्य पीड़ित
लापता 15 वर्षीय सहमत के परिजनों के पास फोन तक नहीं
घटना के बाद लापता लोगों में समस्तीपुर का रहने वाला 15 वर्षीय सहमत भी शामिल है जो महबूब के साथ काम करता था।
सोनीपत के रहने वाले उसके एक रिश्तेदार उसे खोजने की कोशिश कर रहे हैं और इस बीच समस्तीपुर में उसके परिवार के पास फोन तक नहीं है।
उसके पिता मोहम्मद एनुल ने कहा, "अस्पताल में अफरा-तफरी है। काम के लिए इतने लोग गांव छोड़कर जाते हैं। हम गरीब हैं और हमारे पास कोई और विकल्प नहीं।"
अंतिम फोन कॉल
"भईया खत्म होने वाला हूं आज मैं, टाइम कम बचा है"
इस बीच घटना में मारे गए 32 वर्षीय मुशर्रफ अली ने अपने दोस्त शोबित को फोन करके उसके परिवार और बच्चों का ख्याल रखने को कहा था।
सात मिनट की इस बातचीत में अली ने रोते हुए कहा, "भईया खत्म होने वाला हूं आज मैं। टाइम कम बचा है, भागने का रास्ता नहीं है। मेरे परिवार का ख्याल रखना। अब उनके तुम्हारे सिवाय कोई और नहीं है। मर भी जाऊंगा तो वहीं रहूंगा।"
अन्य पीड़ित
मारे गए जमील अहमद के दो बेटे, एक ने किया था घर फोन
घटना में 65 वर्षीय जमील अहमद के दो बेटे, अकरम और मोहम्मद इमरान, भी मारे गए हैं। 38 वर्षीय अकरम ने भी मरने से पहले अपने परिवार को दो बार फोन किया था जिसे वो उठा नहीं पाए।
उन्होंने जब वापस फोन किया तो अकरम ने उनसे उसे बचाने की विनती की। अहमद ने कहा कि अकरम काफी डरा हुआ था।
बाद में उन्हें पता चला कि उनके दोनों बेटे घटना में मार गए हैं।