
जाकिर हुसैन को ऑफर हुआ था 'मुगल-ए-आजम' में युवा सलीम का किरदार, अनसुने किस्से जानिए
क्या है खबर?
संगीतकार उस्ताद तबला वादक जाकिर हुसैन अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है।
अमेरिका में सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली।
उनकी मृत्यु इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) नामक बीमारी के कारण हुई, जो फेफड़ों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है।
आइए हम आपको हुसैन की निजी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से बताते हैं।
फिल्म
'मुगल-ए-आजम' में युवा सलीम का किरदार ऑफर हुआ
हुसैन को दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार की फिल्म 'मुगल-ए-आजम' (1960) में युवा सलीम का किरदार ऑफर हुआ था, लेकिन उनके पिता उन्हें अभिनेता बनाना नहीं चाहते थे और उन्होंने इसके लिए साफ इनकार कर दिया था।
हुसैन ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मेरे पिता और फिल्म के निर्देशक आसिफ बहुत अच्छे दोस्त थे। मैं फिल्म के सेट पर भी गया था और मुझे सलीम का किरदार ऑफर हुआ था, लेकिन अब्बा को यह सब पसंद नहीं था।"
शौक
क्रिकेट खेलने के शौकीन थे हुसैन
बहुत कम लोग जानते हैं कि हुसैन को बचपन में क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था।
वह बचनप में क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे, लेकिन उनके पिता उस्ताद अल्ला रक्खा कुरैशी चाहते थे कि वह तबला वादक बनें, लेकिन उन्होंने कभी हुसैन को क्रिकेटर खेलने से मना नहीं किया।
हालांकि, एक बार क्रिकेट खेलते हुए हुसैन की उंगली टूट गई। इसके बाद अब्बा ने उन्हें क्रिकेट खेलने से सख्त मना कर दिया।
प्रस्तुति
पहली बार बजाया 20 मिनट तबला
हुसैन ने अपनी पहली प्रस्तुति महज 12 साल की आयु में दी थी। एक समय वह अपने पिता के साथ मशहूर सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान साहब के कार्यक्रम में गए थे, जहां हुसैन ने 20 मिनट तक तबला बजाया और इसके लिए उन्हें 20 रुपये दिए गए थे।
एक इंटरव्यू में किस्सा सुनाते हुए हुसैन ने कहा था, "मैंने कार्यक्रम में 20 मिनट तबला बजाया था। मुझे 20 रुपये मिले। यह मेरे लिए करोड़ों रुपये बराबर था। "
उत्साद
हुसैन को पसंद नहीं थी ये बात
हुसैन को पसंद नहीं आता था कि कोई उन्हें उस्ताद बोले। वे अक्सर कहते थे कि "मैं उस्ताद नहीं हूं, सिर्फ जाकिर हूं।"
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "कुछ लोगों ने अपने शो की टिकट बेचने के लिए मेरे नाम के आगे उस्ताद लगाना शुरू कर दिया। मुझे खुद को उस्ताद बुलाना पसंद नहीं।"
बता दें कि साल 1951 में मुंबई में जन्मे हुसैन को भारत सरकार ने पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।