
स्टार्टअप पर पीयूष गोयल की टिप्पणी से छिड़ी बहस, बोले- क्या हम डिलीवरी बॉय बनकर खुश
क्या है खबर?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की एक टिप्पणी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बहस छेड़ दी है।
'स्टार्टअप महाकुंभ' में उन्होंने कहा, "आज भारत के स्टार्टअप क्या कर रहे हैं? अमीरों को खाना पहुंचा रहे हैं, जबकि चीन के स्टार्टअप इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी तकनीक बना रहे हैं।"
उन्होंने युवाओं के स्टार्टअप लक्ष्यों पर सवाल उठाते हुए पूछा, "क्या हम डिलीवरी बॉय बनकर खुश हैं?" इस टिप्पणी से बहस छिड़ गई और कई उद्योग विशेषज्ञों ने इसका विरोध किया है।
तुलना
चीन से तुलना गलत
इंफोसिस के पूर्व CFO मोहनदास पई ने गोयल की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए कहा कि भारत में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और गहन तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स हैं।
पई ने कहा, "यह तुलना गलत है। भारत में भी गहरी तकनीक वाले स्टार्टअप हैं। मंत्री को यह पूछना चाहिए कि उन्होंने डीप-टेक को कितना बढ़ावा दिया।"
उनका मानना है कि तुलना करने से बेहतर है कि सरकार खुद समर्थन दे और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दे।
स्टार्टअप्स
स्टार्टअप्स को कमतर आंकना अनुचित
जेप्टो के सह-संस्थापक आदित पालिचा ने कहा कि भारत में उपभोक्ता स्टार्टअप्स की आलोचना करना आसान है, लेकिन हकीकत यह है कि लाखों लोग ऐसे स्टार्टअप्स से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
पालिचा ने कहा, "भारत में 1.5 लाख लोग जेप्टो पर काम कर रहे हैं, यह स्टार्टअप्स की ताकत का प्रमाण है।"
उन्होंने कहा कि यह भी एक प्रकार की उद्यमिता है और इसे छोटा या कमतर समझना देश के युवाओं की मेहनत का अपमान है।
फोकस
गोयल का फोकस केवल तकनीक पर
गोयल ने कहा कि दूसरे देश जहां AI मॉडल, चिप्स और गहरी तकनीक पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं भारत में कई स्टार्टअप सिर्फ 'ग्लूटेन फ्री' या 'आइसक्रीम' जैसे उत्पाद बेच रहे हैं।
उन्होंने कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि निवेशकों को भी अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाना चाहिए।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी स्टार्टअप का अपना उद्देश्य होता है और भारत को सभी क्षेत्रों में नवाचार को स्वीकार करना चाहिए।
इनोवेशन
दोनों तरह के इनोवेशन हैं अहम
स्टार्टअप से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीकी प्रगति जरूरी है, लेकिन साथ ही उपभोक्ता आधारित स्टार्टअप्स की भूमिका भी उतनी ही अहम है।
भारत जैसे विविध समाज में हर स्तर पर इनोवेशन जरूरी है। डिलीवरी स्टार्टअप्स भी लाखों लोगों को रोजगार देते हैं और तकनीक से ही चलते हैं।
ऐसे में किसी भी एक स्टार्टअप मॉडल को कमतर आंकना संतुलित विकास की सोच के खिलाफ माना जा रहा है।