
सुब्रत रॉय: नमकीन बेचने से लेकर 2 लाख करोड़ का कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने की कहानी
क्या है खबर?
14 नवंबर को सहारा समूह के प्रमुख और कभी देश के ताकतवर कारोबारी घरानों में से एक रहे सुब्रत रॉय का देर रात निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे।
रॉय ने अपना सफर 2,000 रुपये की रकम के साथ स्कूटर पर नमकीन बेचने से शुरू किया था।
आइए आज रॉय के कारोबारी सफर पर नजर डालते हैं।
बचपन
कैसा रहा रॉय का बचपन?
रॉय का जन्म 10 जून, 1948 को बिहार के अररिया जिले में हुआ था। उनके जन्म के कुछ समय बाद ही उनका परिवार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शिफ्ट हो गया।
कहा जाता है कि रॉय पढ़ने-लिखने में काफी आगे थे। गोरखपुर के होली चाइल्ड स्कूल से उन्होंने स्कूली शिक्षा ली यहीं के तकनीकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया था। बाद में गोरखपुर से ही उन्होंने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत की।
नमकीन
स्कूटर पर बेचा करते थे नमकीन
पढ़ाई के बाद रॉय गोरखपुर की गलियों में नमकीन बेचा करते थे। वह अपने स्कूटर पर 'जया' नाम से स्नैक्स बेचते थे।
1978 में उन्होंने अपने एक दोस्त एसके नाथ के साथ मिलकर मात्र 2,000 रुपये के निवेश से 'सहारा' की शुरुआत की। गोरखपुर के सिनेमा रोड पर एक किराए के छोटे से दफ्तर से सहारा समूह का कामकाज शुरू हुआ।
ये एक चिटफंड कंपनी थी, जो लोगों से बचत के लिए छोटी राशि के निवेश को बढ़ावा देती थी।
भरोसा
सहारा पर बढ़ता गया लोगों का भरोसा
कुछ पूंजी जमा होने के बाद रॉय ने कपड़े और पंखे का कारोबार शुरू किया। वे स्कूटर पर ही ये चीजें बेचा करते और लोगों को छोटी-छोटी बचत के बारे में जागरुक करते।
इस बीच लोगों का सहारा पर भरोसा बढ़ने लगा और रॉय की कंपनी चल निकली। वे लोगों से रोजाना या महीने के आधार पर कुछ राशि जमा करवाते और उस पर ज्यादा ब्याज से रिटर्न देते। कई सालों तक लोगों को ब्याज मिला भी।
क्षेत्र
रॉय ने हर क्षेत्र में आजमाए हाथ
शुरुआती सफलता के बाद सहारा ने हर क्षेत्र में अपने हाथ आजमाए। रॉय का साम्राज्य वित्तीय सेवाओं, मीडिया, होटल, प्रॉपर्टी से लेकर शिक्षा तक फैला।
1991 में उन्होंने एयर सहारा की शुरुआत की। 2003 में रॉय ने अपना पहला समाचार चैनल सहारा समय शुरू किया।
सहारा 2001 से 2013 तक भारतीय क्रिकेट टीम का प्रायोजक भी रहा। 2011 में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सहारा ने अपनी टीम 'पुणे वॉरियर्स' उतारी।
पतन
कैसे हुई रॉय के पतन की शुरुआत?
सहारा के पतन की शुरुआत एक चिट्ठी से हुई थी। ये चिट्ठी रोशनलाल नामक शख्स ने नेशनल हाउसिंग बैंक (HAB) को लिखी थी।
इसमें रोशन ने सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन की तरफ से जारी बॉन्ड्स की जांच करने का अनुरोध किया। हालांकि, HAB के पास इस तरह के मामलों की जांच का अधिकार नहीं था, इसलिए उसने ये चिट्ठी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को भेज दी और SEBI ने जांच शुरू की।
कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट गया सहारा का मामला
जांच में SEBI को पता चला की सहारा ने ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर (OFCDS) के जरिए 2 करोड़ लोगों से 24,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। OFCDS जारी करने वाला निवेशक को ब्याज का भुगतान करने के बदले पूंजी जुटा सकता है।
24 नवंबर, 2010 को SEBI ने सहारा समूह को और पैसा लेने पर रोक लगा दी। ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया, जहां कोर्ट ने सहारा को 24,029 करोड़ रुपये 15 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया।
जेल
जब सहारा ने 127 ट्रकों में भेजे दस्तावेज
2013 में सहारा ने 127 ट्रकों में भरकर दस्तावेज जांचकर्ता के पास भेजे।
सहारा ने ये भी कहा कि वो 90 प्रतिशत निवेशकों को पहले ही राशि लौटा चुका है। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे, जिसमें सहारा ये बात साबित नहीं कर सका।
28 फरवरी, 2014 को कोर्ट के आदेश पर रॉय को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और तिहाड़ जेल भेज दिया। 2016 में मां के निधन के बाद रॉय पेरोल पर जेल से बाहर आए थे।
पोर्टल
सरकार ने लॉन्च किया सहारा रिफंड पोर्टल
सहारा समूह की 4 सहकारी समितियों में फंसे जमाकर्ताओं के पैसे वापस करने के लिए सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल लॉन्च किया।
इसके पहले चरण में जमाकर्ताओं को 10,000 रुपये तक का रिफंड मिलेगा और करीब 1.7 करोड़ जमाकर्ता लाभंवित होंगे। सभी जमाकर्ताओं को रिफंड के लिए अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन करना होगा और कुछ मांगे गए दस्तावेज मुहैया कराने होंगे।
अगस्त तक 18 लाख लोग पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके थे।