
क्या ओमिक्रॉन के बाद हो जाएगा कोविड महामारी का अंत, क्यों की जा रही ये उम्मीद?
क्या है खबर?
कोरोना वायरस का बेहद संक्रामक ओमिक्रॉन वेरिएंट दुनियाभर में कहर ढा रहा है और वैश्विक स्तर पर हर रोज रिकॉर्ड नए मामले सामने आ रहे हैं। ये मामले इतने अधिक हैं कि पहली की लहरों में आए मामले इनके आगे बौने साबित होते हैं।
हालांकि वैज्ञानिक ओमिक्रॉन को 'अच्छी खबर' के तौर पर देख रहे हैं और उनका मानना है कि ये महामारी का अंत करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
ऐसा क्यों है, आइए आपको बताते हैं।
लहर
सबसे पहले जानें कितनी भीषण है ओमिक्रॉन की लहर
ओमिक्रॉन की भीषण लहर का सामना कर रही दुनिया में बीते कुछ दिन से 20 लाख से अधिक दैनिक मामले सामने आ रहे हैं।
बुधवार को तो 25 लाख से अधिक वैश्विक मामले दर्ज किए गए, हालांकि असर मामलों की संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है क्योंकि ओमिक्रॉन के अधिकतर मामले बिना लक्षण वाले हैं और वे कभी पकड़ में ही नहीं आते।
ओमिक्रॉन की इस लहर के दौरान 3.5 करोड़ तक दैनिक मामले आने का अनुमान है।
अच्छी खबर
इतने मामलों के बावजूद ओमिक्रॉन को अच्छी खबर क्यों मान रहे वैज्ञानिक?
दरअसल, ओमिक्रॉन के कारण मामलों में तो रिकॉर्ड उछाल आया है, लेकिन अस्पतालों में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या और मौतें इसके अनुपात में न के बराबर बढ़ी हैं।
ओमिक्रॉन की सबसे पहले पहचान करने वाले दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन के संक्रमण से अस्पताल में भर्ती हुए लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना डेल्टा के मुकाबले 73 प्रतिशत कम रही।
ओमिक्रॉन के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का अनुपात भी डेल्टा से कम है।
डाटा
स्टडीज क्या कहती हैं?
ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में हुई स्टडीज में सामने आया है कि ओमिक्रॉन अन्य वेरिएंट्स से लगभग 70 गुना अधिक संक्रामक है, लेकिन ये गंभीर रूप से बीमार नहीं करता है, खासकर वैक्सीन या बूस्टर खुराक लगवा चुके लोगों को।
कारण
कम घातक क्यों साबित हो रहा है ओमिक्रॉन?
ओमिक्रॉन के कम घातक साबित होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जिनमें वैक्सीनेशन और पहले के संक्रमणों के कारण पैदा हुई इम्युनिटी भी शामिल है।
हालांकि इसका प्रमुख कारण जानवरों पर हुई स्टडीज में सामने आया है। दरअसल, ओमिक्रॉन फेफड़ों को अन्य वेरिएंट्स जितना संक्रमित नहीं कर पाता और ऊपरी हिस्से में ही संक्रमण पैदा करता है।
चूंकि गंभीर बीमारी फेफड़ों में संक्रमण पहुंचने पर होती है, इसलिए ओमिक्रॉन कम घातक साबित हो रहा है।
संभावित कारण
ओमिक्रॉन के फेफड़ों को कम नुकसान पहुंचाने का क्या कारण है?
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वायरस विशेषज्ञ रविंद्र गुप्ता की टीम के विश्लेषण में इसकी संभावित वजह पता चलती है।
दरअसल, फेफड़ों की सतह पर TMPRSS2 नामक एक प्रोटीन पाया जाता है। ये प्रोटीन कोरोना वायरस को सेल्स में घुसने में मदद करती है।
गुप्ता की टीम ने पाया कि ये प्रोटीन ओमिक्रॉन को अच्छे से नहीं पकड़ पाता और इसी कारण ये फेफड़ों को अधिक संक्रमित नहीं करता जिससे गंभीर बीमारी का खतरा टल जाता है।
उम्मीद
इन आंकड़ों का महामारी के अंत से क्या संबंध?
ओमिक्रॉन के अधिक संक्रामक लेकिन कम घातक होने के कारण ही वैज्ञानिक उम्मीद लगा रहे हैं कि ये महामारी का अंत साबित हो सकता है। अधिक लोगों को संक्रमिक करने के कारण ये हर्ड इम्युनिटी विकसित करने में मदद करेगा।
इस अनुमान को विज्ञान का साथ भी मिलता है और लगभग हर वायरस के विकास में ऐसा समय आता है, जब ये अधिक संक्रामक लेकिन कम घातक होकर एक सामान्य बीमारी बनकर रह जाता है। कोरोना उसी चरण में है।
चेतावनी
पहले भी महामारी के अंत की उम्मीद लगा चुके हैं वैज्ञानिक
वैसे ये पहली बार नहीं है जब वैज्ञानिक महामारी के अंत की उम्मीद लगा रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान एक-दो बार ऐसा हो चुका है जब इसके अंत की उम्मीद लगाई गई और इसने नया वेरिएंट देकर उन उम्मीदों को धाराशाई कर दिया।
अभी भी कई वैज्ञानिक ओमिक्रॉन के कम घातक होने पर अति-उत्साहित होने को लेकर चेता रहे हैं और उनका कहना है कि इस महामारी के भविष्य़ का अनुमान लगाना बेहद कठिन है।