
अमेरिका: डॉक्टरों ने की गर्भ में पल रहे बच्चे की ब्रेन सर्जरी, पहली बार हुआ ऐसा
क्या है खबर?
मेडिकल साइंस में हो रही तरक्की के कारण आज के समय में दुर्लभ से दुर्लभ बीमारियों का इलाज संभव हो पा रहा है। इसी कड़ी में अब अमेरिका के डॉक्टरों ने एक ओर मुकाम हासिल किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी डॉक्टरों की एक टीम ने ऐसे बच्चे की ब्रेन सर्जरी की है, जो अभी तक पैदा भी नहीं हुआ है।
यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है, जिसमें डॉक्टरों ने गर्भ में ही बच्चे की ब्रेन सर्जरी की है।
बीमारी
दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा था गर्भ में पल रहा बच्चा
यह मुश्किल सर्जरी बोस्टन में ब्रिगम एंड वूमेन हॉस्पिटल एंड बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में मार्च में हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी स्ट्रोक जर्नल में अब प्रकाशित हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, गर्भ में पल रहे बच्चे को वीनस ऑफ गैलेन मालफॉर्मेशन (VOGM) नामक बीमारी थी, जिसमें उसके दिमाग से दिल की तरफ रक्त ले जाने वाली नसों में दिक्कत थी।
यह मामला गंभीर था क्योंकि अगर सर्जरी नहीं होती तो बच्चे के जन्म के बाद उसकी मौत हो सकती थी।
इलाज
अजन्मे बच्चे का इस तरह हुआ इलाज
डॉक्टरों की टीम ने अल्ट्रासोनोग्राफी के जरिए एक लंबी सुई गर्भवती महिला के पेट तक पहुंचाई और फिर मुश्किल सर्जरी की।
डॉक्टरों के मुताबिक, जन्म के बाद बच्चा बिल्कुल ठीक है। उसका वजन बढ़ रहा है और वह सामान्य रूप से खा और पी भी रहा है।
हालांकि, इस दुर्लभ बीमारी में 50-60 प्रतिशत बच्चे बहुत कमजोर हो जाते हैं और उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में मृत्युदर भी 40 प्रतिशत के करीब होती है।
बयान
सर्जरी न होने पर बच्चे के जन्म के बाद हो सकती थी मृत्यु
बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के रेडियोलॉजिस्ट और VOGM के इलाज में विशेषज्ञ डॉ डैरेन ओरबैक ने बताया, "बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसके दिमाग में कई गंभीर चोट लग सकती थी या फिर उसे दिल का दौरा पड़ सकता था। इस कारण सभी डॉक्टरों ने मिलकर गर्भ में ही बच्चे की ब्रेन सर्जरी करने का फैसला किया।"
जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों ने 34 हफ्ते की गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल करते हुए ऑपरेशन किया था।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
बोस्टन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के मुताबिक, वीनस ऑफ गैलेन मालफॉर्मेशन (VOGM) दिमाग की नसों की एक दुर्लभ बीमारी है।
इसमें कोशिकाएं सही तरीके से विकसित नहीं हो पाती, जिसकी वजह से दिमाग से रक्त का प्रवाह कोशिकाओं की बजाय सीधे नसों में होता है।
इस कारण नसों में रक्त का प्रवाह जल्दी हो जाता है। इससे दिमाग में चोट लगने, नसों में गड़बड़ी होना या फिर दिल का दौड़ा पड़ने का जोखिम अधिक हो जाता है।