
संघर्ष की कहानी बताते हुए भावुक हुए शाहबाज़ नदीम, जानें कैसा रहा सफर
क्या है खबर?
कहते हैं कि अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो सारी कायनात तुम्हें उससे मिलाने की साज़िश में लग जाती है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट में डेब्यू करने वाले शाहबाज़ नदीम के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।
'भगवान के वहां देर हैं, लेकिन अंधेर नहीं', इस बात पर दिल से यकीन रखने वाले शाहबाज़ के जीवन में यह कहावत सच हो गई।
19, अक्टूबर, को शाहबाज़ को वो सपना पूरा हुआ, जो उन्होंने सालों पहले देखा था।
कोलकाता
रांची टेस्ट से एक दिन पहले कोलकाता में परिवार के साथ थे शाहबाज़ नदीम
रांची में भारत के दक्षिण अफ्रीका को क्लीन स्वीप देने के बाद शाहबाज़ नदीम ने स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में अपने संघर्ष के बारे में बताया।
शाहबाज़ ने कहा, "जब भारतीय टीम में शामिल होने की खबर आई, तो उस वक्त मैं कोलकाता में परिवार के साथ था। मैं नमाज़ पढ़ रहा था, जब नमाज़ खत्म हुई, तो मैंने कॉल रिसीव की। पहले उन्होंने कहा कि तुम्हें कुलदीप यादव के कवर के रूप में टीम में शामिल किया गया है।"
रांची
कार से तय किया कोलकाता से रांची तक का सफर
शाहबाज़ ने आगे कहा, "15 साल से जिसके लिए आप क्रिकेट खेल रहे हो, वो अगर रात को तीन बजे भी आने को कहेगा, तो आप उठ के जाओगे। इसलिए मैंने फौरन कॉल पर कह दिया कि मैं आ जाऊंगा।"
उन्होंने आगे कहा, "इसके बाद मैंने फ्लाइट चेक की, लेकिन कोई भी फ्लाइट रांची के लिए उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद मैं कार से रांची पहुंचा। सुबह 08:30 बजे पता चल गया कि मैं डेब्यू करने जा रहा हूं।"
अंडर-19
विराट कोहली के साथ भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेले हैं शाहबाज़ नदीम
शाहबाज़ ने बताया कि जब उन्हें भारतीय टीम की कैप मिली, तो रवि शास्त्री ने उनसे कहा कि तुम्हें बहुत मेहनत के कैप मिली है। बहुत कम ही लोग होते हैं जो इतने दिन मेहनत करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, "विराट ने भी मेरा हौसला बढ़ाया। मैं और विराट एकसाथ भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेले हैं। जब कप्तान और कोच आपको इतना इनकरेज करते हैं, तो एक खिलाड़ी के रूप में आप खुद प्रोत्साहित होते हैं।"
रणजी
15 साल पहले रणजी में किया था डेब्यू, धोनी भी थे उस टीम में
गौरतलब है कि शाहबाज़ ने 15 साल पहले 2004 में रणजी में अपना डेब्यू किया था। जब शाहबाज़ ने पहला रणजी मैच खेला था, उस वक्त एमएस धोनी भी उस टीम का हिस्सा थे।
हालांकि, शाहबाज़ के अच्छे प्रदर्शन के बाद भी उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिल रही थी, लेकिन वह अपने पिताजी से हमेशा कहते थे कि एक दिन वे भारत के लिए ज़रूर खेलेंगे।
शाहबाज़ के इसी जज़्बे ने उन्हें हिम्मत न हारने का हौसला दिया।
सपना
एक वक्त मुझे लगा कि अब मैं भारत के लिए नहीं खेल पाऊंगा- शाहबाज़
शाहबाज़ ने कहा, "2010-12 के बाद मुझे लगा कि अब मैं भारत के लिए नहीं खेल पाऊंगा। लेकिन उसके बाद जब मैंने देखा कि मेरी गेंदबाज़ी में और सुधार आया है, तो फिर मैं अपने डैड से बोलता था कि रिटायर होने से पहले मैं ज़रूर भारत के लिए खेलूंगा।"
उन्होंने आगे कहा, "डैड को मुझ पर ज्यादा विश्वास था। उन्होंने मेरे लिए घर पर पिच और फ्लड लाइट लगवाई, ताकि मैं घर पर ही दिन-रात अभ्यास कर सकूं।"
सलाह
धोनी ने दी थी यह अहम सलाह
शाहबाज़ ने कहा, "जब भी माही भाई मिलते थे, तो वह ये नहीं बताते थे कि तुम्हें क्या सीखना चाहिए, बल्कि वह यह बताते थे कि अपनी गेंदबाजी में तुम क्या एडऑन कर सकते हो।"
उन्होंने आगे कहा, "माही भाई कहते थे कि तुम अपनी गेंदबाज़ी की स्ट्रेंथ पर ध्यान दो और उस पर काम करो। ज्यादा नया सीखने पर ध्यान मत दो, जो है उसी में सुधार करो, नया सीखने के चक्कर में जो है वो भी चला जाएगा।"
सपना
आखिर पूरा हुआ सपना
शाहबाज़ के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार 19 अक्टूबर को उनका सपना पूरा हो गया। शाहबाज़ का डेब्यू भी उनके होम ग्राउंड रांची में हुआ, जहां वह अपनी घरेलू टीम के लिए क्रिकेट खेलते थे।
अपने डेब्यू टेस्ट में शाहबाज़ ने चार विकेट लिए। शाहबाज़ ने पहली पारी में 22 रन देकर दो विकेट और दूसरी पारी में 18 रन देकर दो विकेट झटके।
भारत की जीत के बाद अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए शाहबाज़ की आंखे नम थी।