
चीन में दुनिया का सबसे तेज एक्स-रे स्रोत तैयार, इस तरह करेगा काम
क्या है खबर?
चीन में दुनिया का सबसे शक्तिशाली एक्स-रे स्रोत तैयार किया गया है।
बीजिंग से 50 किलोमीटर दूर चीन ने उच्च ऊर्जा फोटॉन स्रोत (HEPS) बनाया है, जो 2025 के अंत तक चालू होगा। यह दुनिया के सबसे चमकीले एक्स-रे किरणें पैदा करेगा, जो सूर्य की सतह से भी 1 लाख करोड़ गुना ज्यादा रोशनी देंगे।
इस तकनीक से वैज्ञानिक बायोलॉजी, फिजिक्स और अन्य क्षेत्रों में सूक्ष्म स्तर पर चीजों को बेहतर तरीके से देख और समझ सकेंगे।
काम
HEPS कैसे काम करेगा?
HEPS में इलेक्ट्रॉनों को तेज गति से घुमाया जाएगा और खास चुंबकों से मोड़कर एक्स-रे पैदा किए जाएंगे।
यह तकनीक बेहद शक्तिशाली है और पहले की तुलना में ज्यादा साफ और सटीक परिणाम देगी। इस सिस्टम में इस्तेमाल हो चुके इलेक्ट्रॉनों को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह ज्यादा टिकाऊ और ऊर्जा बचाने वाला बनता है।
इस नई तकनीक से वैज्ञानिकों को पहले से ज्यादा गहराई से रिसर्च करने में मदद मिलेगी।
भूमिका
चीन के विज्ञान में HEPS की भूमिका
HEPS चीन की 4.8 अरब युआन (लगभग 5,600 करोड़ रुपये) की एक बड़ी वैज्ञानिक परियोजना है।
यह शंघाई की मौजूदा एक्स-रे सुविधा SSRF के साथ मिलकर वैज्ञानिकों को ज्यादा शोध के मौके देगा। SSRF पर पहले से ही भारी भीड़ है और वहां रिसर्च के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
HEPS के शुरू होने से यह समस्या कम होगी और चीन वैज्ञानिक अनुसंधान में और आगे बढ़ सकेगा।