
ऐपल का ऐप ट्रैकिंग फीचर काफी नहीं, अब भी डाटा जुटा रही हैं आईफोन ऐप्स- रिपोर्ट
क्या है खबर?
कैलिफोर्निया की टेक कंपनी ऐपल ने इस साल की शुरुआत में iOS 14.5 अपडेट के साथ ऐप ट्रैकिंग ट्रांसपैरेंसी फीचर दिया था।
कंपनी ने दावा किया था कि इसके साथ यूजर्स को बेहतर प्राइवेसी मिलेगी और ऐप्स को ट्रैकिंग से पहले अनुमति लेनी होगी।
इस फीचर के साथ थर्ड-पार्टी ऐप्स को यूजर का डाटा जुटाने से रोका जाता लेकिन नई रिपोर्ट की मानें तो ऐप्स अब भी आईफोन यूजर्स का डाटा इस्तेमाल कर रही हैं।
रिपोर्ट
अब भी डाटा जुटा रही हैं ढेरों बड़ी ऐप्स
नई रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ढेरों बड़ी ऐप्स यूजर्स की ओर से अनुमति ना मिलने के बावजूद आईफोन्स से उनका डाटा जुटा रही हैं।
इसमें स्नैप और फेसबुक (मेटा) जैसी कंपनियों के डाटा जुटाने से जुड़े तरीकों का जिक्र किया गया है।
ये ऐप्स बेशक यूजर्स से ट्रैक करने की अनुमति लेती हैं लेकिन अनुमति ना मिलने पर ऐसा करने के लिए नए तरीके आजमाती हैं।
तरीका
यूजर की पहचान छुपाकर डाटा कलेक्शन
डाटा कलेक्शन का नया तरीका यूजर के बजाय उसके डिवाइस पर फोकस करता है।
ऐप्स इसके लिए सीधे यूजर का डाटा ना जुटाकर उसकी पहचान छुपा लेती हैं और डिवाइस से डाटा जुटाया जाता है।
ऐसा डिवाइस से मिलने वाले डाटा को लगातार एनालाइज कर किया जाता है।
सवाल अब भी बरकरार है कि आईफोन यूजर्स की ओर से ट्रैकिंग की अनुमति ना दिए जाने के बावजूद भी ऐप्स ऐसा क्यों कर रही हैं।
गूगल
सर्च इंजन कंपनी भी इस्तेमाल करती है ऐसा तरीका
सर्च इंजन कंपनी गूगल के FLoC प्रोग्राम में भी इससे मिलता-जुलता तरीका डाटा जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है।
इस गूगल प्रोग्राम का मकसद ब्राउजर कुकीज का विकल्प बनना था और यह 'एक जैसी पसंद वाले यूजर्स के बड़े समूह' पर फोकस करता था।
इस तरह FLoC के साथ अलग-अलग यूजर्स का डाटा बिना उनकी पहचान जाने, एक ग्रुप की तरह जुटाया गया था।
आईफोन्स ऐप्स भी नया फीचर आने के बाद ऐसा ही कर रही हैं।
चिंता
यूजर्स का डाटा ऐप्स से सुरक्षित नहीं
प्राइवेसी से जुड़ा ट्रांसपैरेंसी फीचर iOS में शामिल करते वक्त ऐपल को खासकर फेसबुक (तब मेटा) के विरोध का सामना करना पड़ा था।
ऐप्स और कंपनियों का कहना था कि नए फीचर के चलते वे टारगेटेड ऐड नहीं दिखा पाएंगे।
फीचर के बावजूद डाटा जुटाने के तरीके ऐप्स के पास होना दिखाता है कि ऐपल अपने वादे पर खरी नहीं उतरी है।
दूसरी संभावना यह है कि ऐप्स ने मौजूदा फीचर की कमियों का फायदा उठाना सीख लिया है।
सवाल
क्या झूठा है ऐप्स की ट्रैकिंग से बचाने का दावा?
ऐपल का नया फीचर ट्रैकिंग से पहले मोबाइल ऐप्स से यूजर्स की अनुमति लेने को कहता है।
यानी कि डाटा जुटाने और इस्तेमाल करने से पहले यूजर को पता होना चाहिए।
इनकार करने पर यूजर का पर्सनल डाटा ट्रैक नहीं किया जाता, हालांकि ऐप्स की फंक्शनैलिटी से जुड़ी जरूरी अनुमति उसे फिर भी मिल जाती है।
ऐप बाकी डिवाइस डाटा का इस्तेमाल यूजर को समझने और ऐड दिखाने के लिए कर सकती है।
न्यूजबाइट्स प्लस
पूरी तरह प्राइवेसी नहीं देता कोई फीचर
इंटरनेट की दुनिया में पूरी तरह प्राइवेसी मिलना लगभग नामुमकिन है और ऐप्स से लेकर वेबसाइट्स तक यूजर्स को ट्रैक करती हैं।
हालांकि, ऐसा उसे ऐड दिखाने के लिए किया जाता है और यह ऐप्स या वेबसाइट्स के लिए कमाई का सबसे बड़ा तरीका भी है।
आसान भाषा में समझें तो जिन ऐप्स या वेबसाइट्स की सेवाओं के लिए आप भुगतान नहीं करते, वे आपका डाटा बदले में लेकर सेवाएं देती हैं।