स्वतंत्रता दिवस पर क्यों उड़ाई जाती हैं पतंग? जानिए इस परंपरा की ऐतिहासिक दास्तां
क्या है खबर?
स्वतंत्रता दिवस प्रत्येक भारतीय के लिए स्वशासन, संप्रभुता और लोकतंत्र के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।
इस साल देश अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा और हर साल की तरह इस बार भी इस मौके पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा हुआ दिखेगा।
यह परंपरा आज भले ही मनोरंजक लगती है, लेकिन इसकी शुरूआत खुशहाल नहीं थी। इसका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है, खासकर अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में।
आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
इतिहास
साइमन के खिलाफ विरोध जताने के लिए किया गया था पतंग का इस्तेमाल
जब साइमन कमीशन आयोग में भारतीय सदस्यों की अनुपस्थिति से भारतीय आक्रोशित थे तो उन्होंने आयोग के अध्यक्ष जॉन साइमन के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए साल 1928 में 'साइमन गो बैक' के नारे लगाए थे।
इस विरोध के दौरान लोगों ने काली पतंग पर भी साइमन गो बैक लिखकर आसमान में उड़ाया था।
आजादी के बाद पतंग उड़ाने की परंपरा बरकरार रही और अब लोग इसे आजादी के प्रतीक के रूप में उड़ाते हैं।
तरीका
इस तरह से पतंगबाजी का उठाएं लुत्फ
स्वतंत्रता दिवस पतंग उड़ाए बिना भी अधूरा-सा लगता है।
वैसे भी अपनी आजादी के जश्न को मनाने का यह एक अच्छा तरीका है। इसके लिए शाम को घर की छत पर अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ चढ़ जाएं और सभी के साथ मिलकर पतंग उड़ाएं।
इसी के साथ आप कुछ देशभक्ति के गाने बजाएं और खाने-पीने का प्रोग्राम भी रखें।
यकीनन इस तरह से यह शाम आपके लिए यादगार बन जाएगी।
जानकारी
15 अगस्त, 1947 पर हुई थी स्वतंत्रता दिवस मनाने की शुरूआत
15 अगस्त, 1947 को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में लाल किले के ऊपर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और आधिकारिक तौर पर भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया।
यह महत्वपूर्ण अवसर सालों के अथक संघर्ष, अहिंसक प्रतिरोध, कई स्वतंत्रता सेनानियों और महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह जैसे कई अन्य नेताओं द्वारा दिए गए बलिदान के बाद आया है।
तब से लेकर हर 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाया जाता है।
अन्य त्योहार
इन त्योहारों पर भी उड़ाई जाती है पतंग
स्वतंत्रता दिवस के अलावा उत्तर भारत में मकर संक्रांति, बसंत पंचमी और अन्य त्योहारों के दौरान भी पतंग उड़ाने का चलन है।
गुजरात और राजस्थान में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना एक बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसे विश्वकर्मा पूजा, अक्षय तृतीया और अन्य समारोह में उड़ाई जाती है।
पंजाब में यह बसंत पंचमी त्योहार का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो वसंत के आगमन का प्रतीक है।