
क्या होती है स्टाइरीन गैस जिसके विशाखापट्टनम में लीक होने से मचा हडकंप?
क्या है खबर?
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आरएस वेंकटपुरम गांव की LG पॉलिमर इंडस्ट्री प्लांट में गुरुवार तड़के लीक हुई जहरीली गैस 'स्टाइरीन' ने एक बच्चे सहित 13 लोगों की जान ले ली।
सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आकर बीमार पड़ गए और करीब 500 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। हालांकि, अब गैस रिसाव को रोक दिया गया है।
इसके बाद भी कई सवाल खड़े हैं कि आखिर स्टाइरीन गैस होती क्या है और यह कैसे इतनी खतरनाक है?
स्टाइरीन
क्या होती है स्टाइरीन गैस?
US नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार स्टाइरीन सिर्फ एक गैस नहीं है। यह सॉलिड या लिक्विड रूप में किसी भी चीज में मिल सकती है।
यह फलों, सब्जियों, मूंगफलियों, मांस आदि में भी मिल जाती है। इसका उपयोग पॉलीस्टायर्न प्लास्टिक, फाइबरग्लास, रबर और लेटेक्स को तरल रूप में लाने के लिए किया जाता है।
सिगरेट और वाहनों से निकलने वाले धुंए में इसकी मौजदूगी होती है। यह गैस हवा, पानी या मिट्टी से आपके शरीर में आ सकती है।
जानकारी
स्टाइरीन से इन चीजों को होता है निर्माण
स्टाइरीन के उपयोग से इन्सुलेशन, पाइप, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, प्रिंटिंग कार्ट्रिज और कॉपी मशीन टोनर, खाद्य कंटेनर, पैकेजिंग सामग्री, कारपेट बैकिंग, फ्लोर वैक्सेज, जूते, खिलौने, और पॉलिश का निर्माण किया जाता है। यह बहुत घातक गैस है।
प्रभाव
स्टाइरीन के संपर्क में आने से शरीर पर होता है यह प्रभाव
US नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार यदि कोई स्टाइरीन गैस के संपर्क में आता है तो यह उसकी नाक, मुंह या छूने से शरीर में प्रवेश कर सकती है।
यह एक रंगहीन तरल पदार्थ होता है जो हवा के संपर्क में आते ही गैस बनकर फैलने लगता है।
इससे आंखों में जलन, रंग पहचानने में परेशानी, बहुत अधिक थकान, नशे जैसी हालत, ध्यान लगाकर काम नहीं कर पाना, सुनने की समस्या और लीवर की बीमारी होती है।
PVC
क्या है PVC गैस और क्या होता है इसका असर?
विशेषज्ञों के अनुसार प्लांट से स्टाइरीन गैस के साथ PVC गैस का भी रिसाव हुआ है। PVC यानी पॉलीविनाइल क्लोराइड का उपयोग बिल्डिंग मैटेरियल बनाने में होता है।
इसमें PVC पाइप, खिड़कियों के फ्रेम, दरवाजे, ज्वाइंट्स, टंकी आदि बनाए जाते हैं। इसके संपर्क में आने वाले लोगों को आंखों में तेज जलन, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, बेहोश होना जैसी परेशानी होती है।
PVC फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों में ये परेशानी आम है।
जानकारी
फैक्ट्री शुरू होने से पहले ही हुआ गैस का रिसाव
पुलिस उपायुक्त (DCP) स्वरूपा रानी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण 40 दिन से बंद पड़ी इस फैक्ट्री को गुरुवार से फिर से शुरू किया जाना था, लेकिन तड़के ही अचानक इससे गैस का रिसाव शुरू हो गया। मामले की जांच जारी है।
गांव
पांच गांव खाली कराए गए
DCP रानी ने बताया कि घटना के बाद करीब तीन किलोमीटर के क्षेत्र में गैस का असर पहुंचा था।
ऐसे में आस-पास के पांच गांवों को पूरी तरह से खाली करा लिया गया है। इसके अलावा प्रभावित लोगों को अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में पॉलीस्टाइन उत्पादों जैसे मेकअप के लिए इलेक्ट्रिक फैन ब्लेड, कप और कटलरी और कंटेनरों का निर्माण किया जाता था। इसमें ही स्टाइरीन और PVC गैस का उपयोग होता था।
घटना
गैस के संपर्क में आने के बाद सड़कों पर बेहोश होकर गिर गए थे लोग
DCP रानी ने बताया कि गैस का रिसाव होने के बाद आस-पास के गांव के सैकड़ों लोग इसके संपर्क में आए थे। सुबह तक दर्जनों लोग बेहोश होकर सड़कों पर गिर गए।
अधिकर लोगों को आंखों में जलन और चक्कर आने की शिकायत हुई थी। करीब 50 एंबुलेंस की मदद से लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने अस्पताल पहुंचकर लोगों की कुशलक्षेम ली और जिला कलक्टर को पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।
जानकारी
1961 में हुई थी कंपनी की स्थापना
बता दें कि हिंदुस्तान पॉलिमर कंपनी की स्थापना 1961 में हुई थी। 1997 में कंपनी को साउथ कोरिया की LG केमिकल ने टेकओवर कर लिया था और इसे LG पॉलिमर नाम दिया था। प्लांट में पॉलीस्टाइनिन और एक्सपेंडबल पॉलीस्टायर्न बनाने का काम किया जाता है।