
अयोध्या फैसले के खिलाफ 18 पुनर्विचार याचिकाओं पर आज होगी सुनवाई
क्या है खबर?
अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच चैंबर में गुरुवार दोपहर 01:40 बजे इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस एस बोबड़े की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और एस नजीर के अलावा जस्टिस संजीव खन्ना होंगे।
जस्टिस संजीव खन्ना को पूर्व CJI रंजन गोगोई की जगह इस बेंच में शामिल किया गया है।
जानकारी
क्या होता है सुनवाई का नियम?
नियमों के मुताबिक, पुनर्विचार याचिकाओं पर वही बेंच सुनवाई करती है, जिसने फैसला सुनाया होता है। चूंकि इस मामले में रंजन गोगोई रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उनके स्थान पर जस्टिस खन्ना बेंच का हिस्सा होंगे।
फैसला
क्या था अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला?
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाते हुए 2.7 एकड़ की विवादित भूमि पर रामलला विराजमान का हक माना था।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।
पूर्व CJI के नेतृत्व वाली बेंच के इस फैसले के खिलाफ अब तक 19 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिनमें से 18 याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
जानकारी
अनुच्छेद 137 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पुनर्विचार की शक्ति
संविधान के अनुच्छेद 137 में सुप्रीम कोर्ट को अपने दिए फैसलों पर पुनर्विचार करने की शक्ति दी गई है। हालांकि, यह पुनर्विचार तभी होता है जब कोर्ट को लगता है कि उसके दिए गए मूल फैसले में कोई तथ्यपरक या कानूनी खामी हो।
सुनवाई
चैंबर में क्यों होगी सुनवाई?
पुनर्विचार याचिकाओं पर सीधे खुली अदालत में सुनवाई या बहस नहीं होती। पहले बेंच चैंबर में फाइल और रिकॉर्ड देखकर विचार करती है कि किसी मामले की खुली अदालत में सुनवाई की जरूरत है या नहीं।
अगर कोर्ट को लगता है कि मामले पर खुली अदालत में सुनवाई या बहस की जरूरत है तो एक नोटिस जारी किया जाता है।
इसमें मामले को खुली अदालत में सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया जाता है।
पुनर्विचार याचिकाएं
कुल 18 याचिकाओं में से 9 पक्षकारों की तरफ से
सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच आज जिन 18 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, उनमें से नौ पक्षकारों की तरफ से दायर की गई हैं।
बाकी नौ अन्य याचिकाकर्ता है। चूंकि ये रिप्रेजेंटेटिव सूट यानी प्रतिनिधियों के जरिए लड़ा जाने वाला मुकदमा है। इसलिए इसमें पक्षकारों के अलावा भी कोई पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है।
बता दें कि ऐसे कम ही मौके आए हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले को पलटा है।
पुनर्विचार याचिका
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने की थी पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहली पुनर्विचार याचिका जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने दाखिल की थी।
जमीयत ने कहा कि इस मामले में असल न्याय तभी होगा जब कोर्ट विवादित भूमि पर बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने का आदेश दे।
वहीं हिंदू पक्ष की तरफ से हिंदू महासभा ने पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। महासभा सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने के आदेश पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर कर रही है।