
रिचा भारती को नहीं बांटनी होगीं कुरान की प्रतियां, रांची कोर्ट ने बदला अपना फैसला
क्या है खबर?
कुरान बांटने की शर्त पर छात्रा को जमानत देने वाली रांची की कोर्ट ने अपना फैसला पलट दिया है।
कोर्ट ने जांच अधिकारी की सिफारिश पर इस शर्त को रद्द कर दिया।
रिचा भारती नामक छात्रा अब 7000 हजार रुपये की जमानत राशि पर रिहा हो सकती है।
रिचा ने फेसबुक पर एक सांप्रदायिक पोस्ट किया था, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
कोर्ट ने कुरान की 5 प्रतियां बांटने की शर्त पर उसे जमानत दी थी।
सुनवाई
जांच अधिकारी ने कहा, कुरान बांटने की शर्त को लागू करने में होगी कठिनाई
फैसले को लेकर उठ रहे सवालों और जांच अधिकारी की सिफारिश पर न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार ने बुधवार को अपना फैसला पलट दिया।
उनके फैसले में लिखा है, "जांच अधिकारी ने कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा पवित्र कुरान बांटने की शर्त को लागू करने में कठिनाई के कारण इसे रद्द कर देना चाहिए। याचिका पढ़ने और दलील सुनने के बाद ये कोर्ट कुरान बांटने की शर्त को हटाकर अपने पुराने फैसले में बदलाव करती है।"
पूरा मामला
रिचा ने की थी सांप्रदायिक पोस्ट
रांची वीमन्स कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा रिचा के खिलाफ 12 जुलाई को फेसबुक पर सांप्रदायिक पोस्ट करने के लिए पिथौरिया पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
खबरों के अनुसार, उसने तबरेज अंसारी से संबंधित कुछ बात कहते हुए सवाल किया था कि एक ही समुदाय से आतंकवादी क्यों होते हैं।
इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल में बंद कर दिया।
स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने रिचा की गिरफ्तारी का सख्त विरोध किया था।
विवाद
रिचा ने किया था कुरान बांटने से इनकार
मंगलवार को रांची कोर्ट ने रिचा को कुरान की 5 प्रतियां बांटने की शर्त पर जमानत दी, जिससे विवाद और बढ़ गया।
रिचा ने कोर्ट के आदेश के बाद कुरान बांटने से इनकार कर दिया, जिसके बाद कई लोग उनके समर्थन में आए और ट्विटर पर ये एक ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया।
रांची बार एसोसिएशन ने मजिस्ट्रेट के फैसले का विरोध करते हुए न्यायिक कमिश्नर से मुलाकात की और मनीष कुमार का तबादला करने की मांग की।
विरोध
वकीलों और नेताओं ने भी उठाए फैसले पर सवाल
कई वकीलों और भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने भी कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए।
वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने ट्वीट करते हुए लिखा, "बाद में किए जाने वाले कार्यों के आधार पर जमानत देना गलत और अव्यावहारिक है। इन शर्तों पर पहले जमानत लेना और बाद में उनसे पीछे हटना भी गलत है।"
समाज को बांटने का काम करने वाले लोगों ने इस फैसले का प्रयोग नफरत फैलाने के लिए भी किया।