
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में देश के सबसे बड़े केबल पुल 'सुदर्शन सेतु' का किया उद्घाटन
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह गुजरात में सुदर्शन सेतु का उद्घाटन कर दिया है। यह पुल कुल 4.77 किलोमीटर लंबा है, जिसका 2.32 किलोमीटर हिस्सा केबल पर टिका है।
यह ओखा मेनलैंड और बेट द्वारका द्वीप को जोड़ेगा और इसे सिग्नेचर ब्रिज के रूप में भी जाना जाता है। यह पुल द्वारकाधीश मंदिर में आने वालों श्रद्धालुओं के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।
आइए जानते हैं कि इस पुल की क्या खासियत है।
खासियत
क्या है सुदर्शन सेतु की खासियत?
गुजरात में लगभग 980 करोड़ रुपये की लागत से बना नवनिर्मित सुदर्शन सेतु देश का सबसे लंबा केबल-आधारित पुल है। इस पुल पर कुल 32 खंभे लगे हैं, जो 900 मीटर लंबाई के 7 केबल स्पैन को उनकी जगह पर टिकाए रखे हैं।
इस पुल पर 27 मीटर चौड़े कैरिजवे के अलावा दोनों तरफ फुटपाथ हैं और फुटपाथ के ऊपरी हिस्सों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जो एक मेगावाट बिजली पैदा करते हैं।
ट्विटर पोस्ट
गुजरात में सुदर्शन सेतु का किया उद्धाटन
#WATCH गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओखा मुख्य भूमि और बेट द्वारका को जोड़ने वाले लगभग 2.32 किमी देश के सबसे लंबे केबल-आधारित पुल सुदर्शन सेतु का उद्घाटन किया। pic.twitter.com/OaNMST0a9v
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 25, 2024
कनेक्टिविटी
पुल निर्माण से आवागमन होगा सुगम
बेट द्वारका गुजरात तट पर दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है और यह 36 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। ये ओखा नगर पालिका का हिस्सा है और इसकी आबादी लगभग 10,000 है।
ओखा-बेट सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण से पहले तीर्थयात्रियों को बेट में द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर तक पहुंचने के लिए नाव पर ही निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब इस पुल के माध्यम से हर मौसम में बेट द्वारिका पहुंचा जा सकता है।
बयान
मोदी बोले- सुदर्शन सेतु विकास और प्रगति का जीवंत प्रमाण
प्रधानमंत्री मोदी ने सुदर्शन सेतु के उद्धाटन से पहले सुबह बेट द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की।
उन्होंने कहा कि उन्हें सुदर्शन सेतु का उद्घाटन करते हुए खुशी हो रही है और यह विकास और प्रगति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक जीवंत प्रमाण है।
मोदी आज गुजरात में अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होंगे और 52,250 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इसमें स्वास्थ्य, सड़क, रेल, ऊर्जा, पर्यटन कई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
पर्यटन
2017 में प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी पुल की नींव
इस पुल को स्थानीय लोगों और द्वारकाधीश मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए काफी अहम माना जा रहा है। ओखा-बेट द्वारका के बीच सुगम आवगमन के लिए इस पुल की नींव 2017 में प्रधानमंत्री ने रखी थी।
पहले नाव के माध्यम से ही इस द्वीप पर पहुंचा जा सकता था। इस द्वीप में दर्जनों अन्य हिंदू मंदिर, एक गुरुद्वारा और कुछ मस्जिदें भी हैं। इस द्वीप के लोगों आजीविका पर्यटन गतिविधियों के अलावा मछली पकड़ने पर टिकी है।
सी-लिंक
गुजरात का पहला सी-लिंक सिग्नेचर ब्रिज
इस पुल को राष्ट्रीय राजमार्ग 51 के एक भाग के रूप में बनाया गया है, जो सौराष्ट्र के समुद्री तट के साथ चलता है। यह तकनीकी रूप से गुजरात का पहला सी-लिंक सिग्नेचर ब्रिज है।
राज्य सरकार ने इस पुल निर्माण का ठेका एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। यह कंपनी तब विवादों में घिर गई थी, जब इसके द्वारा बिहार में निर्माणाधीन पुल एक साल के भीतर दूसरी बार ढह गया था।
राहत
नाव संचालकों समक्ष खड़ा हो सकता है संकट
इस पुल निर्माण से जहां आम लोगों को राहत मिली है, वहीं ओखा में नाव संचालकों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
द्वारकाधीश टूरिज्म फेरीबोट एसोसिएशन के अध्यक्ष इब्राहिम कुरैशी ने कहा कि वर्तमान में ओखा-बेट द्वारका के बीच लगभग 170 नावें संचालित होती हैं और पुल बनने से नाव यातायात में भारी गिरावट की आशंका है।
उन्होंने कहा कि सरकार अगर किराया बढ़ाने की अनुमति देगी तो नाव संचालकों को कुछ राहत मिल सकती है।