
अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों की कोरोना वायरस मृत्यु दर 15-20 गुना अधिक- ICMR
क्या है खबर?
केंद्र सरकार के एक विशेषज्ञ समूह के अनुसार, अन्य किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों की कोरोना वायरस की वजह से मरने या इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती होने की संभावना आम लोगों की तुलना में 15 से 20 गुना ज्यादा होती है।
इन बीमारियों में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फेफेड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियां आदि शामिल हैं और इनसे ग्रसित लोगों के कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने की अधिक संभावना रहती है।
बयान
अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को वैक्सीनेशन से सबसे ज्यादा फायदा- विशेषज्ञ
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की राष्ट्रीय टास्क फोर्स के ऑपरेशन्स रिसर्च ग्रुप के प्रमुख डॉ एनके अरोड़ा ने कहा, "यह देखा गया है कि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों जैसी समस्याएं सामान्य लोगों के मुकाबले मौत और ICU के खतरे को 15-20 गुना बढ़ा देती हैं।"
उन्होंने कहा कि इसी कारण अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को वैक्सीनेशन से सबसे अधिक फायदा होगा।
सलाह
वैक्सीनेशन से पहले परामर्श ले सकते हैं लाभार्थी- डॉ अरोड़ा
डॉ अरोड़ा ने कहा कि अगर किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को वैक्सीनेशन से संबंधित कोई शंका है तो वे वैक्सीन लगवाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन के कोर्स को पूरा करना जरूरी है क्योंकि वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के 15 दिन बाद ही बनती हैं और इसी के बाद हम पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं।
सलाह
संक्रमित हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लगवाने की सलाह
डॉ अरोड़ा ने उन लोगों को भी कोरोना वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जो पहले ही कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि कोविड-19 के एक तिहाई मरीजों में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज नहीं बनती हैं और इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि भारतीयों में ये एंटीबॉडीज कितने समय तक बनी रहती हैं। इसी कारण सबके लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है ताकि हम बीमारी को रोक सकें।"
वैक्सीनेशन
भारत में क्या है कोरोना वैक्सीनेशन की स्थिति?
16 जनवरी को शुरू हुए भारत के कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में अब तक 62.59 लाख लोगों को वैक्सीन की एक खुराक लग चुकी है और वह सबसे कम समय में इतनी खुराकें लगाने वाला देश है।
जिन लोगों को वैक्सीन लगाई गई है, उनमें से मात्र 29 को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी है जो कुल वैक्सीनेशन के 0.0005 प्रतिशत के बराबर है। इन 29 में से नौ लोगों की मौत हुई है।
वैक्सीनें
देश में दो रहा दो वैक्सीनों का उपयोग, लेकिन लोगों में भरोसे की कमी
भारत में अभी दो कोरोना वैक्सीनों- भारत बायोटेक की 'कोवैक्सिन' और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की 'कोविशील्ड'- का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि ट्रायल पूरा न होने के कारण कोवैक्सिन पर सवाल भी उठ रहे हैं और लोग इस वैक्सीन को लगवाने से कतरा रहे हैं।
वैक्सीनों को लेकर इसी शंका और भय के कारण वैक्सीनेशन की रफ्तार कम बनी हुई है और 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 40 प्रतिशत से भी कम वैक्सीनेशन हुआ है।