
महामारी का असर: विदेशों से केरल लौटे 8.4 लाख प्रवासी, 5.5 लाख की गई नौकरी
क्या है खबर?
कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट के बीच बीते साल मई से लेकर अब तक 5.5 लाख लोग विदेशों से केरल लौट चुके हैं। इन लोगों ने नौकरी जाने को वापस घर आने का कारण बताया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल मई के पहले सप्ताह से लेकर इस साल 4 जनवरी तक कुल 8.43 लाख लोग विदेशों से केरल आए हैं।
इनमें से 5.52 लाख की नौकरी गई है।
माइग्रेशन
लगभग दो लाख अन्य कारणों से भारत लौटे
केरल लौटने वाले बाकी लोगों में से 2.08 लाख ऐसे हैं, जिनका या तो वर्क वीजा खत्म हो चुका है या दूसरे कारणों से वो भारत लौटे हैं।
इनके अलावा केरल आने वाले बाकी बचे 1.08 लाख लोग नौकरी गंवाने वाले लोगों के परिजन हैं।
कोरोना महामारी के कारण नौकरियों पर आए इस संकट के कारण विदेशों से आने वाले रेमिटेंस पर असर पड़ेगा, जिसका प्रभाव केरल की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
बयान
घटना को लेकर चिंतित नहीं है विशेषज्ञ
हालांकि, जानकार इसे बहुत चिंता की बात नहीं मानते।
इंटरनेशनल माइग्रेशन के विशेषज्ञ प्रोफेसर एस ईरुदया राजन इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहते हैं, "संकट में फंसे प्रवासियों की संख्या बहुत कम होगी। मैं मानता हूं कि इनमें से ही कुछ ही लोग संकट का सामना करेंगे। अधिकतर लोग आने वाले महीनों में नौकरियों के लिए नए ठिकाने ढूंढ लेंगे। बड़ी संख्या में लोग पहले से ही वापस जाना शुरू हो गए हैं।
बयान
रेमिटेंस में 10-15 फीसदी गिरावट का अनुमान- राजन
राजन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि केरल को मिलने वाले रेमिटेंस (विदेशों में नौकरी करने वाले लोग जो पैसा घर भेजते हैं) में बहुत गिरावट आएगी। केरल को 2018 में 85,000 करोड़ रुपये रेमिटेंस प्राप्त हुआ था। 2020 तक यह बढ़कर 1,00,000 करोड़ होने का अनुमान था। इस बार कोरोना के कारण इसमें 10-15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
उन्होंने कहा कि महामारी के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में माइग्रेशन का नया रास्ता हो सकता है।
केरल
NRI डिपॉजिट में भी हो रही बढ़ोतरी
दूसरी तरफ जैसे-जैसे लोग विदेशों से केरल लौट रहे हैं, यहां के बैंकों में NRI डिपॉजिट की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
विदेशों में रहने वाले NRI जब विदेशी मुद्रा को भारतीय बैंकों में जमा करते हैं तो उसे NRI डिपॉजिट कहा जाता है। भारतीय स्टेट बैंक की NRI सेल के AGM अजय कुमार ने बताया कि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में NRI डिपॉजिट में लगातार इजाफा देखने को मिला था।
वजह
क्यों बढ़ा NRI डिपॉजिट?
कुमार ने कहा कि हर महीने NRI डिपॉजिट में 300 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पहली छमाही में इस इजाफे की वजह डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी हो सकती है। ऐसा होने पर NRI ज्यादा पैसा भेजते हैं। साथ ही इस बार महामारी के कारण लोगों के पास खर्च या व्यापार करने के लिए ज्यादा मौके नहीं थे। इस वजह से उन्होंने पैसा बैंक में जमा किया।
जानकारी
दिसंबर के बाद से NRI डिपॉजिट में आने लगी गिरावट
हालांकि, दिसंबर के बाद से NRI डिपॉजिट में गिरावट देखने को मिल रही है। कुमार ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि अब लॉकडाउन और दूसरी पाबंदियां हटने के कारण लोग खर्च करने लगे हैं और व्यापारिक गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं।