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एक बार फिर बदला अशोक खेमका का विभाग, 27 साल में 52वीं बार हुआ तबादला

एक बार फिर बदला अशोक खेमका का विभाग, 27 साल में 52वीं बार हुआ तबादला

Mar 04, 2019
12:38 pm

क्या है खबर?

अपनी ईमानदारी और तबादलों के लिए हरियाणा के चर्चित IAS अधिकारी अशोक खेमका का एक बार फिर तबादला किया गया है। खेमका की 27 साल की नौकरी में यह 52वां तबादला है। अभी तक वे खेल और युवा कार्यक्रम विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) थे। यहां से उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का प्रधान सचिव बनाकर भेजा गया है। खेमका रॉबर्ट वाड्रा और DLF की जमीन डील रद्द करने के बाद चर्चा में आए थे।

नियुक्ति

पहले भी इस विभाग में रह चुके हैं खेमका

खेमका पहले भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में तैनात रह चुके हैं। अब एक बार फिर वे इस विभाग में अपनी सेवाएं देंगे। खेमका को लगभग 15 महीने पहले खेल और युवा मामलों के विभाग में नियुक्त किया गया था। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के ACS अमित झा को अशोक खेमका की जगह खेल और युवा कार्यक्रम विभाग में ACS बनाया गया है। खेमका के साथ हरियाणा सरकार ने नौ अन्य IAS और HCS अधिकारियों का तबादला किया है।

सवाल

बयान बना तबादले की वजह?

हरियाणा सरकार ने हाल ही में अरावली क्षेत्र में चकबंदी की इजाजत दी थी। इस पर सवाल उठाते हुए खेमका ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि इससे भू-माफियाओं के हौंसले बढ़ेंगे। यह बयान सामने आने के कुछ दिन बाद ही खेमका का तबादला कर दिया गया। उनके इस तबादले को उनके बयान से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इससे पहले 2012 में चकबंदी महानिदेशक रहते हुए खेमका ने ही इस इलाके में चकबंदी पर रोक लगाई थी।

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तबादला

खट्टर सरकार में छठा तबादला

हरियाणा में जब कांग्रेस सरकार में थी और उस वक्त खेमका का तबादला होता था तब भाजपा खूब विरोध करती थी। अक्टूबर, 2014 में हरियाणा में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार उनका छह बार तबादला कर चुकी है। अपने तबादलों से परेशान खेमका ने पहले कहा था, "सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, मुझे हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि मैं लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करता रहा हूं।"

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करियर

चर्चित अधिकारी हैं खेमका

खेमका 1991 बैच के हरियाणा कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनकी पहली पोस्टिंग सन 1993 में हुई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में वे कुछ विभागों में एक महीने से भी कम समय के लिए तैनात रहे हैं। उनकी कुछ ही पोस्ट ऐसी रही हैं जहां उन्होंने एक साल से ज्यादा का समय गुजारा हो। खेमका का नाम 2012 में चर्चा में आया था, जब उन्होंने राबर्ट वाड्रा और DLF के बीच हुए जमीन सौदे को रद्द कर दिया था।

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