
दिल्ली हिंसा: भड़काऊ बयानों पर कार्रवाई के लिए पुलिस ने मांगा समय, अप्रैल में अगली सुनवाई
क्या है खबर?
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में फिर सुनवाई हुई।
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरशंकर की बेंच ने भड़काऊ बयान देने को लेकर नेताओं पर FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की।
इस दौरान दिल्ली पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करने के समय की मांग की, जिसके बाद उसे 13 अप्रैल तक का समय दिया गया है। उसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।
सुनवाई
गृह मंत्रालय को भी बनाया गया मामले का पक्षकार
मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा की कल कोर्ट ने भड़काऊ बयानों पर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए जवाब मांगा था।
उन्होंने कहा कि यह बयान कुछ महीने पहले दिए गए थे। याचिकाकर्ता केवल कुछ बयानों को चुनकर कार्रवाई की मांग नहीं कर सकता।
साथ ही उन्होंने मांग की कि गृह मंत्रालय को दिल्ली हिंसा मामले में पक्षकार बनाया जाए, जिसे मंजूर कर लिा गया।
सुनवाई
मेहता ने FIR दर्ज करने के लिए मांगा समय
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस स्थिति में भड़काऊ बयान देने वाले भाजपा के और दूसरे नेताओं पर FIR दर्ज करना अनुकूल नहीं होगा। मेहता ने इस सिलसिले में और समय की मांग करते हुए कहा कि पहले दिल्ली में हालात सामान्य करने पर ध्यान देने की जरूरत है।
वहीं दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे राहुल मेहरा ने कहा कि FIR दर्ज करना पहला कदम है। फिलहाल लोगों की सुरक्षा को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
दलील
याचिकाकर्ता के वकील ने कही यह बात
वहीं याचिकाकर्ता के वकील कोलिन गोंजाल्विस ने कहा मजबूत प्रदर्शनों के बाद भी समाज में शांति रह सकती है, लेकिन लोगों को जाकर मारने के लिए भड़काया गया। ऐसे मौकों पर भड़काऊ बयान देना सबसे बुरी चीज है। ऐसे वीडियो पूरे देश में देखे जाते हैं। अगर इन बयानों की वजह से किसी की जान जाती है तो उन्हें देने वाले नेताओं को हत्या के मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए। सत्ताधारी पार्टी के नेता ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं।
जानकारी
मामले में दर्ज की जा चुकी है 48 FIR
चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या इस मामले में 11 FIR दर्ज की गई है? इस पर सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कल तक 11 थी। आज 37 FIR और दर्ज की गई है। इस तरह कुल 48 FIR की जा चुकी है।
सुनवाई
बुधवार को कोर्ट ने अपनाया था सख्त रूख
इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली में हिंसा को लेकर सख्त रूख अपनाया था।
जस्टिस मुरलीधर ने कहा था कि वे दिल्ली में 1984 जैसी घटना दोबारा नहीं होने दे सकते। कोर्ट 1984 में दिल्ली में हुए सिख दंगों की तरफ इशारा कर रही थी।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भड़काऊ भाषण देने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने पर विचार करने को भी कहा था।
डाटा
हिंसा में मारे गए लोगों को मुआवजे की घोषणा
रविवार को नागरिकता कानून को लेकर शुरू हुई हिंसा में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 लोग घायल बताए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने मृतकों को 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।