
बेरूत में विस्फोट के बाद नीलाम किया गया चेन्नई में रखा लगभग 700 टन अमोनियम नाइट्रेट
क्या है खबर?
लेबनान की राजधानी बेरूत में अमोनियम नाइट्रेट में विस्फोट के बाद सतर्क हुए प्रशासन ने चेन्नई में रखे 690 टन अमोनियम नाइट्रेट को नीलाम कर दिया है। कुछ कंटेनरों को हैदराबाद भेज दिया गया है, वहीं बाकी कंटेनरों को भी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए जल्द ही भेज दिया जाएगा।
बेरूत में विस्फोट के बाद से ही चेन्नई में इस विस्फोटक पदार्थ के भंडार को लेकर सवाल उठ रहे थे।
धमाका
बेरूत बंदरगाह पर जब्त किए गए अमोनियम नाइट्रेट में हुआ था धमाका
पिछले हफ्ते मंगलवार को बेरूत के बंदरगाह के एक गोदाम में छह साल से रखे 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में बड़े विस्फोट से शहर का एक हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया था।
धमाके में दो किलोमीटर के दायरे के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। अब तक 150 से अधिक लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 3,000 घायल हुए हैं। धमाके में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
दुर्घटना को निमंत्रण
2015 में जब्त किया गया था चेन्नई में रखा अमोनियम नाइट्रेट
इस धमाके के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में चेन्नई के बाहरी इलाके में रखे लगभग 700 टन अमोनियम नाइट्रेट को लेकर चिंता जाहिर की गई थी, जो बेरूत जैसी घटना को निमंत्रण दे रहा था।
इसे 2015 में जब्त किया गया था और यह पटाखे बनाने के लिए मशहूर शिवाकाशी समूह के लिए लाया गया था। निर्यातक ने खाद बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करने की बात कही थी, लेकिन जांच में यह विस्फोटक स्तर का पाया गया।
नीलामी
हो रही थीं जब्त अमोनियम नाइट्रेट की नीलामी की तैयारियां
अधिकारियों के अनुसार, इस अमोनियम नाइट्रेट को अवैध तरीके से दक्षिण कोरिया से आयात किया गया था और इसे जब्त करने के बाद निर्यातक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।
दिसंबर 2015 की बाढ़ में इसमें से सात टन अमोनियम नाइट्रेट खराब हो गया था और बाकी 690 टन को नीलाम करने की तैयारियां की जा रही थीं। अब 1.80 करोड़ रुपये के बाकी अमोनियम नाइट्रेट की ई-नीलामी पूरी हो गई है और इसे हैदराबाद भेजा जा रहा है।
अमोनियम नाइट्रेट
क्या होता है अमोनियम नाइट्रेट?
अमोनियम नाइट्रेट अमोनिया और नाइट्रोजन से मिलकर बनता है। यह एक गंधहीन सफेद रंग का केमिकल पदार्थ होता है।
खाद बनाने के अलावा इसका उपयोग विस्फोटक बनाने में भी होता है। यह विस्फोट में ऑक्सीडाइजर का काम करता है जिससे विस्फोट की ताकत कई गुना बढ़ जाती है।
इसके भंडारण में समस्या तब आती है जब ये नमी सोखने लगता है और चट्टान में बदल जाता है। फिर इसके आग के संपर्क में आने पर विस्फोट की आशंका रहती है।
खतरा
गलत निकला था भंडार के आसपास कोई रिहायशी इलाका न होने का दावा
सीमा शुल्क विभाग ने ये भी कहा है कि इस विस्फोटक पदार्थ को चेन्नई शहर से 20 किलोमीटर और नजदीकी रिहायशी इलाके से दो किलोमीटर दूर सुरक्षित रखा गया था।
हालांकि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने विभाग के इस दावे को गलत बताया था और बयान जारी कर रहा था कि ये अमोनियम नाइट्रेट 12,000 लोगों की आबादी वाले दो रिहायशी इलाकों के दो किलोमीटर के दायरे में रखा है।