
श्रीलंका ने गिरफ्तार किए तमिलनाडु के 43 मछुआरे, 6 नावों को भी किया जब्त
क्या है खबर?
श्रीलंका में आज एक बार फिर से नौसैनिकों ने तमिलनाडु के 43 मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया और उनकी छह नावों को भी अपने कब्जे में ले लिया।
भारत के मछुआरा संघ ने गिरफ्तारियों की आलोचना करते हुए कहा है कि वह मंगलवार को धरना देंगे। उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान भी किया है।
मछुआरों को क्यों गिरफ्तार किया गया, ये अभी तक साफ नहीं हैं, हालांकि सीमाएं पार करने के कारण अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।
मामला
कच्चातीवू द्वीप के पास मछली पकड़ रहे थे मछुआरे
केंद्र सरकार के मत्स्य विभाग के एक अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि 18 दिसंबर को 500 से अधिक नावों पर तमिलनाडु के मछुआरे रवाना हुए थे और कच्चातीवू द्वीप के आसपास मछली पकड़ रहे थे।
तभी श्रीलंका के नौसैनिकों ने आकर नौ नावों को जब्त कर 43 मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कांगेसंथुराई कैंप ले जाया गया है।
रामनाथपुरम के सांसद के नवासकनी ने मामले में केंद्रीय मंत्रियों से बात की है।
विवाद
कच्चातीवू द्वीप को लेकर कई दशकों से है विवाद
बता दें कि कच्चातीवू द्वीप को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है और यहां पहले भी कई बार भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
भारत और श्रीलंका के बीच पढ़ने वाले इस द्वीप पर ऐतिहासिक तौर पर भारत का दावा रहा है और यह मद्रांस प्रांत के राजा रामनद की जमींदारी का हिस्सा था। तमिलनाडु के मछुआरे अक्सर इसका प्रयोग मछली पकड़ने और जालों को सुखाने के लिए करते थे।
विवाद का कारण
1974 में हुए समझौते में श्रीलंका को दिया गया द्वीप
इस ऐतिहासिक दावे के बावजूद 1974 में इंदिरा गांधी सरकार ने एक समझौते के तहत कच्चातीवू को श्रीलंका को दे दिया, हालांकि इस समझौते में तमिलनाडु के मछुआरों को द्वीप के पास मछली पकड़ने का अधिकार भी दिया गया।
लेकिन 1976 के एक और समझौते ने इस अधिकारी को भी छीन लिया और तब से श्रीलंका द्वीप पर पूरी तरह से अपना दावा करता आया है।
2008 में करुणानिधि ने द्वीप को श्रीलंका से वापस लेने की मांग की थी।
अन्य मामले
एक-दूसरे के इलाके में घुसते रहते हैं भारत और श्रीलंका के मछुआरे
बता दें कि भारत और श्रीलंका के मछुआरों का मछली पकड़ते वक्त एक-दूसरे के इलाके में घुस जाना आम है और कई बार दोनों देश ऐसे मछुआरों को गिरफ्तार भी कर चुकी हैं। हालांकि बाद में उन्हें अदला-बदली करके छोड़ दिया जाता है।
भारतीय मछुआरे श्रीलंकाई नौसेना पर उत्पीड़न करने का आरोप भी लगाते रहे हैं और तमिलनाडु की सरकार इस मामले को केंद्र सरकार के आगे भी उठा चुकी है।