
क्या UGC की जगह उच्च शिक्षा आयोग बनाएगी सरकार? मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
क्या है खबर?
20 जुलाई से लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत होने जा रही है।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सत्र में केंद्र सरकार भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के गठन से जुड़े विधेयक को पेश कर सकती है।
इस उच्च शिक्षा आयोग के गठन की तैयारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के आने के बाद से ही शुरू हो गई थी।
इसको लेकर शिक्षा मंत्रालय ने मसौदा तैयार किया था, अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
क्या
क्या है सरकार की योजना?
सरकार का कहना है कि अभी उच्च शिक्षा अलग-अलग नियामकों के बीच बिखरी है।
वर्तमान में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) जैसे 14 नियामक कार्य कर रहे हैं।
सरकार की योजना इन सभी नियामकों की जगह एकल नियामक बनाने की है।
नई शिक्षा नीति में भी सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक नियामक भारतीय उच्च शिक्षा परिषद के गठन की बात कही गई है।
फायदा
एकल नियामक बनने से क्या फायदा होगा?
वर्तमान में एक संस्थान में अलग-अलग कोर्सों को संचालित करने के लिए सभी नियामकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ये उच्च शिक्षा की दिशा में अवरोध पैदा करते हैं। ऐसे में भारतीय उच्च शिक्षा आयोग सभी नियामकों को नियंत्रित करने का काम करेगी।
इससे सभी शैक्षिक कार्य समय पर होंगे और सभी कोर्स के लिए मानक तैयार किए जाएंगे।
ये नियामक उच्च शिक्षण संस्थाओं को शिक्षा, शिक्षण और शोध के क्षेत्र में विकास के लिए भी प्रेरित करेगा।
संस्था
4 स्वतंत्र संस्थाएं बनाई जाएंगी
भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के तहत 4 स्वतंत्र संस्थाएं बनाई जाएंगी।
इसमें राष्ट्रीय उच्च शिक्षा विनियामक परिषद (NHERC), राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (NAC), उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (HEGC) और सामान्य शिक्षा परिषद (GEC) बनाई जाएंगी।
NHERC चिकित्सा और विधिक शिक्षा को छोड़कर अन्य उच्च शिक्षा को नियंत्रित करेगी।
NAC उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन करेगी और HEGC शिक्षण संस्थानों की फंडिंग का काम करेगी।
GEC नए-नए शिक्षा कार्यक्रमों को तैयार करने और उन्हें लागू करने का काम करेगी।
खत्म
क्या खत्म हो जाएगा UGC?
कहा जा रहा है कि भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के बनने के बाद UGC का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
UGC 28 दिसंबर, 1953 को अस्तित्व में आया था। इसके बाद से ये उच्च शिक्षा के मामलों को नियंत्रित कर रहा है।
उच्च शिक्षण संस्थानों की फंडिंग का काम भी UGC करता आया है, लेकिन अब ये जिम्मेदारी HEGC निभाएगी।
नए भारतीय उच्च शिक्षा आयोग में पहले से मौजूद नियामक संस्थाओं के प्रमुखों को शामिल किया जाएगा।