
CBSE मूल्यांकन नीति को सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी, अब नहीं स्वीकार होगी कोई याचिका
क्या है खबर?
12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की मूल्यांकन नीति को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि CBSE की यह मूल्यांकन नीति पूरी तरह से सही है।
कोर्ट ने मूल्यांकन फॉर्मूले को उचित ठहराते हुए कहा कि इस मामले पर अब किसी याचिका को स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या बातें हुईं?
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा, "जहां तक फार्मूले का सवाल है, हम साफ स्पष्ट कर रहे हैं कि यह अपने अंतिम रूप पर पहुंच चुकी है। हम इस मुद्दे को दोबारा नहीं खोलेंगे।"
कोर्ट ने कहा कि वह CBSE की योजना को फिर नहीं खोलेगी और उन याचिकाकर्ताओं को भी इसे चुनौती देने भी अनुमति नहीं है, जिन्हें अंकों के मूल्यांकन को लेकर शिकायत है।
अधिकार
किसी को चुनौती देने का अधिकार नहीं होगा- कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "दूसरे शब्दों में कहें तो याचिकाकर्ताओं को अंकों के मूल्यांकन के उद्देश्य से योजना या इसमें निर्धारित अनुपात को चुनौती देने का अधिकार नहीं होगा। इसे बरकरार रखा गया है और पिछले आदेशों को इस कोर्ट की मंजूरी मिल चुकी है।"
पीठ ने कहा कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व पर शीघ्रता से निर्णय लिया जाना चाहिए।
डाटा
17 जून को मूल्यांकन योजना को मिली थी मंजूरी
17 जून को कोर्ट ने काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) और CBSE की मूल्यांकन योजनाओं को मंजूरी दी थी। इसमें 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के परिणामों के आधार पर 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में क्रमश: 30:30:40 का फार्मूला अपनाया गया था।
मामला
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कोविड महामारी के कारण CBSE की 2021 की बोर्ड परीक्षा नहीं हो पाई थी।
विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर CBSE ने बिना बोर्ड परीक्षा कराए 10वीं और 12वीं के छात्रों का रिजल्ट तैयार करने के लिए नयी मूल्यांकन नीति निर्धारित की थी।
बोर्ड ने इसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था जिसने इसे मंजूरी दे दी।
इसके बाद कुछ अभिभावकों और छात्रों ने इस नीति को फिर से कोर्ट में चुनौती दी थी जिन्हें आज खारिज कर दिया गया।