
कौन हैं JNU से पढ़े अभिजीत बनर्जी, जिन्हें मिला इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार?
क्या है खबर?
भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उनके साथ उनकी पत्नी एस्थर डुफलो और माइकल क्रेमर को भी ये सम्मान मिला है।
तीनों अर्थशास्त्रियों को गरीबी दूर करने के लिए एक्सपेरिमेंट अप्रोच के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।
कहा जाता है कि पिछले कुछ सालों में इस अप्रोच ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इकनॉमिक साइंसेज कैटिगरी के तहत यह सम्मान पाने वाले अभिजीत भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं।
सम्मान
MIT में प्रोफेसर हैं अभिजीत
फिलहाल अभिजीत और डुफलो मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) और क्रेमर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
फ्रांस की एस्थर डुफलो यह सम्मान पाने वाली दूसरी महिला हैं। उनसे पहले 2009 में अमेरिकी की एलिनोर ऑस्ट्रोम ने यह पुरस्कार जीता था।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने कहा कि इस साल सम्मान पाने वाले अर्थशास्त्रियों ने गरीबी से लड़ने में दुनिया की क्षमता में बढोतरी की है। दो दशकों में ही एक्सपेरिमेंट एप्रोच ने विकास अर्थशास्त्र को बदल दिया है।
जानकारी
लाखों बच्चों को मिला अभिजीत के अध्ययन का फायदा
बीबीसी के मुताबिक, अभिजीत के ही एक अध्ययन पर भारत में विकलांग बच्चों की स्कूली शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाया गया, जिसमें लगभग 50 लाख बच्चों को फायदा पहुंचा है।
परिचय
कलकता में जन्मे हैं अभिजीत
अभिजीत बनर्जी का जन्म 1961 में कोलकाता में हुआ था। उनकी माता निर्मला बनर्जी कोलकता के सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंस में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर और पिता दीपक बनर्जी प्रेसिडेंसी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख थे।
अभिजीत की स्कूली शिक्षा कोलकाता के साउथ प्वाइंट स्कूल में हुई। उन्होंने 1981 में प्रेसिडेंसी कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन पूरी की।
इसके बाद उन्होंने मास्टर्स के लिए दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दाखिला लिया।
परिचय
चार किताबें लिख चुके हैं अभिजीत
JNU से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से PhD की।
फिलहाल वह MIT में अर्थशास्त्र के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं। उन्होंने एस्थर डुफलो और सेंथिल मुलैनाथन के साथ मिलकर 2003 में अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी एक्शन लैब (J-PAL) की स्थापना की थी। वह अब भी इसके बोर्ड डायरेक्टर हैं।
चार किताबें लिख चुके अभिजीत संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उच्च-स्तरीय पैनल के सदस्य भी रहे हैं।
सम्मान
अभी तक 81 लोगों को मिल चुका है यह सम्मान
अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार को आधिकारिक तौर पर बैंक ऑफ स्वीडन प्राइज इन इकॉनोमिक साइंस के नाम से जाना जाता है।
इसे स्वीडन के सेंट्रल बैंक ने 1968 में शुरू किया था और इसका पहले विजेता का नाम एक साल बाद घोषित किया गया था। अभी तक कुल 81 लोगों को यह सम्मान दिया जा चुका है।
बता दें, पिछले हफ्ते, फिजिक्स, कैमेस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।