
मालदीव में भारतीय सैनिक क्यों तैनात हैं और उन्हें क्यों हटाना चाहती है वहां की सरकार?
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव और भारत के बीच पैदा हुआ तनाव अब और बढ़ गया है।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने आधिकारिक तौर पर भारत से कहा है कि वो 15 मार्च तक अपने सैनिकों को मालदीव से हटा ले।
इसकी जानकारी मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता अब्दुल्ला नजीम इब्राहिम ने दी।
आइए जानते हैं कि आखिर मालदीव में भारतीय सैनिक क्यों हैं और मालदीव सरकार उन्हें क्यों हटाना चाहती है।
भारतीय सैनिक
मालदीव में कितने भारतीय सैनिक हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में मालदीव में 88 भारतीय सैनिक मौजूद हैं, जिन्हें मालदीव के सैनिकों को युद्ध, टोही और बचाव-सहायता कार्यों में प्रशिक्षण देने के लिए तैनात किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव के कुछ नागरिक और राजनेता देश में किसी भी रूप में भारतीय सैनिकों की उपस्थिति का विरोध करते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रपति मुइज्जू के 'इंडिया आउट' अभियान में इन सैनिकों की उपस्थिति को राष्ट्र के लिए खतरा बताया गया था।
सैन्य अभियान
मालदीव में भारतीय सैनिकों की तैनाती कैसे हुई?
भारत और मालदीव के बीच रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का एक लंबा इतिहास है।
नवंबर, 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की सरकार के अनुरोध पर तख्तापलट को नाकाम करने के लिए पहली बार भारतीय सेना के जवान यहां आए थे।
'ऑपरेशन कैक्टस' के तहत भारतीय सैनिक राष्ट्रपति को सुरक्षित करने और विद्रोहियों को पकड़ने में कामयाब रहे।
मालदीव ने दशकों तक भारत की भूमिका को सराहा, लेकिन 2020 के बाद से भारत विरोधी भावनाएं बढ़ने लगीं।
काम
अभी भारतीय सैनिक मालदीव में क्या कर रहे हैं?
दरअसल, भारत ने मालदीव को 2 हेलीकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान दिए थे, जिनका उपयोग ज्यादातर समुद्री निगरानी, खोज और बचाव कार्यों के लिए किया जाता है।
इसके अलावा मरीजों को एक द्वीप से दूसरे द्वीप पर ले जाने का काम भी इनके जरिए किया जाता है। भारतीय सैनिक इन अभियानों का प्रबंधन करते हैं।
पहले हेलीकॉप्टर और चालक दल ने 2010 में मालदीव में परिचालन शुरू किया था और तब भारत समर्थक मोहम्मद नशीद यहां के राष्ट्रपति थे।
कारण
क्यों भारतीय सैनिकों को हटाना चाहता है मालदीव?
मौजूदा राष्ट्रपति मुइज्जू को भारत विरोधी और चीन समर्थक माना जाता है। उन्होंने अपने चुनावी अभियान में 'इंडिया आउट' का नारा दिया था और इस अभियान में जोर-शोर से भारत के खिलाफ भावनाओं को भड़काया था।
उन्होंने अपने प्रचार में भारतीय सैनिकों को देश से निकालने का वादा किया था और भारत के प्रभाव को देश की संप्रभुता के लिए खतरा बताया था।
इसके अलावा उन्होंने भारत की मदद को भी खतरे के रूप में पेश किया था।
कारक
किन चीजों का इस्तेमाल कर भारत विरोधी भावनाएं भड़काई गईं?
भारत ने साल 2010 और 2015 में भारत ने मालदीव को 2 ध्रुव एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर दिए थे।
इनका इस्तेमाल मानवीय उद्देश्यों और मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है।
इन्हीं हेलिकॉप्टर को लेकर यह दर्शाने की कोशिश की जाने लगी कि भारत सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा।
इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की सरकार में भारत के साथ व्यवहार में 'पारदर्शिता की कमी' के जरिए भी भावनाएं भड़काई गईं।
अन्य कारक
भारत विरोधी भावनाओं के लिए और क्या चीजें जिम्मेदार रहीं?
मालदीव समुद्री सुरक्षा के लिए भारत पर अत्यधिक निर्भर है, जिसको लेकर यह तर्क दिया गया कि भारत मालदीव के इलाके में सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है।
इसके अलावा 2021 में हस्ताक्षरित उथुरु थिला फाल्हू-द्वीप (UTF) हार्बर परियोजना भी एक कारक रही।
इसके तहत भारत को मालदीव की राजधानी माले में नौसैनिक जहाजों के लिए रखरखाव और मरम्मत केंद्र विकसित करना था, लेकिन स्पष्टीकरण के बावजूद अफवाह फैलाई गई कि इसे भारतीय नौसेना के अड्डे में बदल दिया जाएगा।