
प्रशांत महासागर में मिलीं समुद्री जीवों की 5,000 से ज्यादा नई प्रजातियां, विलुप्त होने का डर
क्या है खबर?
दुनिया के सबसे बड़े महासागर प्रशांत महासागर में वैज्ञानिकों ने समुद्री जीवों की 5,000 से ज्यादा नई प्रजातियों की खोज की है। ये प्रजातियां महासागर के क्लेरियन-क्लिपर्टन जोन (CCZ) इलाके में मिली हैं।
इस इलाके में खनिज पदार्थ भी अधिक मात्रा में हैं, इसलिए इसे 'मिनरल रिच' भी कहा जाता है।
इलाके में जल्द ही खनिजों की माइनिंग शुरू होने वाली है, इसलिए वैज्ञानिकों को इन प्रजातियों के विलुप्त होने का डर है।
खोज
92 प्रतिशत प्रजातियों को पहले कभी नहीं देखा गया
यह अध्ययन 'करेंट बायोलॉजी' नामक एक वैज्ञानिक पत्रिका में गुरुवार को प्रकाशित हुआ।
अध्ययन के मुताबिक, CCZ से मिले 5,578 जीव अब तक के जीव विज्ञान के लिए बिल्कुल नए हैं। इनमें से लगभग 88-92 प्रतिशत प्रजातियों को पहले कभी नहीं देखा गया था, जबकि सिर्फ 6 जीव ऐसे हैं, जो इसके पहले भी कहीं और देखे जा चुके हैं।
इसका मतलब है कि ये जीव बहुत ही अनोखे हैं।
माइनिंग
माइनिंग के कारण ईकोसिस्टम पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव
CCZ में जल्द माइनिंग शुरू होने वाली है। इसके लिए अब तक कुल 17 डीप-सी माइनिंग कॉन्ट्रैक्टर्स को माइनिंग का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है।
ये कंपनियां इंग्लैंड, अमेरिका और चीन की हैं, जो इलाके से निकिल, कोबाल्ट और मैगेनीज जैसे तत्वों की माइनिंग करके उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में बेचेंगी।
एक तरफ खनिजों की माइनिंग और दूसरी तरफ हजारों नई समुद्री प्रजातियों की खोज, ऐसे में वैज्ञानिकों ने ईकोसिस्टम पर माइनिंग के प्रभाव पर चिंता जताई है।
बयान
शोध के प्रमुख लेखक ने क्या कहा?
शोध के प्रमुख और नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) में डीप-सी इकोलॉजिस्ट म्यूरियल रबोन का कहना है कि समुद्र के अंदर की इस अद्भुत जैव-विविधता को समझने और इसको संरक्षित रखने की जिम्मेदारी हस सबकी है।
रबोन ने आगे कहा, "हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि माइनिंग के बाद इन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा तो नहीं पैदा होगा।"
कुछ वैज्ञानिकों ने माइनिंग रोकने की सलाह दी है क्योंकि उनके मुताबिक इससे समुद्री जीवों को नुकसान होगा।
बयान
6 किलोमीटर की गहराई में मिले हैं ये जीव
NHM में डीप-सी बायोलॉजिस्ट एड्रियन ग्लोवर ने कहा, "शोध के लिए रिसर्च क्रूज के जरिए नए जीवों को इकट्ठा किया गया और उस दौरान हमने वीडियो के जरिए देखा कि जीवों वाला इलाका 6 किलोमीटर गहरा, ठंडा और अंधेरा वाला था, फिर भी वहां तक जीवन बना हुआ है। ये खुद में एक रहस्य है।"
उन्होंने आगे कहा कि बतौर वैज्ञानिक हमारा काम जानकारी देना है, लेकिन खनन शुरू हो, इससे पहले ही कुछ नियम बनाने की जरूरत है।