
आंध्र प्रदेश: कोंडाला रायडू मंदिर में भगवान को चढ़ाए जाते हैं जिंदा जहरीले बिच्छु, जानिए कारण
क्या है खबर?
आमतौर पर लोग भगवान के आगे फल-फूल या प्रसाद चढ़ाणे हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश के कोंडाला रायडू मंदिर में एक अजीब परंपरा का पालन किया जाता है।
वहां भक्त भगवान को खुश करने के लिए उनके आगे जिंदा जहरीले बिच्छू अर्पित करते हैं। यह मंदिर राज्य के कुरनूल जिले के कोडुमुरु में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है।
आइए इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
मान्यता
मनोकामना पूरी करने के लिए बिच्छु चढ़ाते हैं लोग
ऐसी मान्यता है कि भगवान को बिच्छू चढ़ाने से मनोकामनाएं जल्द पूरी होती है।
यही वजह है कि कई लोग मंदिर में जाने से पहले उसके पास की पहाड़ी चोटी पर पत्थरों के नीचे बिच्छुओं को ढूंढते हैं और बिना किसी डर के उन्हें अपने हाथों में पकड़ लेते हैं।
यह परंपरा वर्षों पुरानी है और अमूमन प्रत्येक श्रावण मास के तीसरे सोमवार को दूर-दराज से भी भक्त इस विशेष परंपरा का जश्न मनाने के लिए मंदिर में आते हैं।
तस्वीरें
बिच्छु को पकड़ते हुए लोगों की तस्वीरें
लोग जिंदा जहरीले बिच्छु को पकड़ने के लिए किसी खास चीज का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं।
अधिकांश बिच्छु बहुत जहरीले होते हैं, जिनके काटने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन लोगों का मानना है कि उनके भगवान उन्हें कुछ नहीं होने देंगेऔर प्रतिकूल घटनाओं का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है।
इस परंपरा की कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिसमें भक्तों को बिच्छू को नंगे हाथों से पकड़े देखा जा सकता है।
राज्य
कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों से भी मंदिर आते हैं लोग
कोंडाला रायडू मंदिर कई सालों पुराना है और हर साल श्रावण महीने के शुभ तीसरे सोमवार को आंध्र प्रदेश के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में आते हैं।
मंदिर के अध्यक्ष येद्दुला महेश्वर रेड्डी के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में भगवान कोंडालारायुडु को बिच्छू देने और भगवान बालाजी के दूसरे नाम गोविंद नाम का 3 बार पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
अन्य मंदिर
भक्तों को प्रसाद में मिलते हैं सोने-चांदी के गहने
जहां कोंडाला रायडू मंदिर में जहरीले बिच्छ चढ़ाने की परंपरा है, वहीं मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के माणक शहर में स्थित एक देवी लक्ष्मी का मंदिर है। इस मंदिर में भक्तों को सोने-चांदी के गहने प्रसाद के तौर पर दिए जाते हैं।
दरअसल, दीपोत्सव के 5 दिनों के दौरान मंदिर में कुबेर का दरबार लगता है। इस दौरान जो भी भक्त मंदिर में आते हैं, उन्हें प्रसाद के रूप में सोने-चांदी के गहने और रुपये-पैसे दिए जाते हैं।