
ऑस्ट्रेलिया: महिला एथलीट 107 दिनों में दौड़ीं 107 मैराथन, बनाया सबसे ज्यादा दौड़ने का वर्ल्ड रिकॉर्ड
क्या है खबर?
ऑस्ट्रेलिया की एक महिला एथलीट ने 107 दिनों में 107 मैराथन दौड़ कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
महिला ने अगस्त में क्वींसलैंड के केप यॉर्क से दौड़ने की शुरुआत की थी और 107 दिनों बाद यानी 3 दिसंबर को उन्होंने गिनीज बुक में नया रिकॉर्ड दर्ज किया।
महिला अपने देश के वन्यजीवों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए दौड़ रही है।
रिकॉर्ड
107 दिनों तक रोजाना 26.2 मील दौड़कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली 32 वर्षीय एरचना मर्रे बार्टलेट ने अगस्त में क्वींसलैंड के केप यॉर्क से 26.2 मील की मैराथन दौड़ शुरू की।
इसके बाद उन्होंने 107 दिनों तक रोजाना इतना ही दौड़कर 'लगातार सबसे अधिक दिनों तक मैराथन दौड़ने' का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया और गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराया।
इस साल की शुरुआत में ही ब्रिटेन के रहने वाले केट जेडेन ने 106 दिनों तक मैराथन दौड़ने का रिकॉर्ड बनाया था।
बयान
150 मैराथन पूरा करना चाहती हैं एरचना
एरचना ने कहा, "लगातार 107 दिनों तक दौड़ने से मेरे पैर, पीठ और शरीर के कई अंगों में दर्द होने लगा है। मैं भावनात्मक रूप से भी थक चुकी हूं, लेकिन मैं यहां पर रुकूंगी नहीं। मैं यह देखना चाहती हूं कि मैं अभी और कितना कुछ कर सकती हूं। फिलहाल मैं अपनी 150वीं मैराथन पूरी करना चाहती हूं।"
रिपोर्ट के मुताबिक, एरचना के मैराथन दौड़ने के पीछे उनका एक खास मकसद भी छिपा हुआ है।
मकसद
खास मकसद से दौड़ रहीं एरचना
एरचना के लगातार दौड़ने की पीछे का कारण उनका प्रोजेक्ट 'टिप टू टो' है जो वन्यजीव संरक्षण के लिए है।
इस प्रोजेक्ट के नाम का मतलब है कि एरचना ने अपनी दौड़ केप यॉर्क से शुरू की थी, जिसे ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी 'टिप' यानि छोर के रूप में जाना जाता है और वह अपनी 150वीं मैराथन विक्टोरिया के मेलबॉर्न पोर्ट पर पूरी करना चाहती हैं जिसे देश के दक्षिणी 'टो' के रूप में जाना जाता है।
वन्यजीव
वन्यजीवों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहीं एरचना
एरचना ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पास कई तरह के वन्य जीव हैं, लेकिन फिर भी देश जैव विविधता में नुकसान उठा रहा है।
उन्होंने कहा, "हमारे पास लगभग 500 देशी जानवर ऐसे हैं जो फिलहाल विलुप्त होने की कगार पर हैं और यह संख्या 2016 से आठ प्रतिशत बढ़ी है। मुझे लगता है कि नीति-निर्माताओं को शिक्षित करने की जरूरत है ताकि वह सही कदम ले सकें, इसलिए मैं देशी जानवरों की आवाज बनने के लिए दौड़ रही हूं।"