
AI टेक्नोलॉजी होगी अंधेपन के इलाज के लिए मददगार, यहां तक पहुंचा प्रयास
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को उद्योगों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाने वाली टेक्नोलॉजी के तौर पर देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य से जुड़े शोध और इलाज में पहले से इसका इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन नई AI टेक्नोलॉजी से चीजें और बेहतर होने की उम्मीद है।
AI से इलाज में तेजी आने और सटीक उपचार में मदद मिल सकती है। अंधेपन के इलाज के लिए भी इस तकनीक से काफी उम्मीदें हैं।
इलाज
इलाज में देरी से भी अंधे हो रहे हैं लोग
नेत्र रोगियों की संख्या ज्यादा होने से इलाज में देरी से भी कई लोग अंधे हो रहे हैं। यह भी माना गया कि बीमारी का जल्द से जल्द पता लगाने और उपचार करने से आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है।
टेक्नोलॉजी के जरिए इन चुनौतियों को कम किया जा सकता है। इसके लिए नए नेत्र स्कैनर ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT) मददगार हैं। ये स्कैनर रेटिना की हाई-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीर ले सकते हैं।
सिस्टम
AI सिस्टम कर सकते हैं स्कैन का विश्लेषण
आंख की बीमारी पता लगाने वाले OCT स्कैनर से मिली जानकारी को आम डॉक्टरों के लिए समझना आसान नहीं है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम काम करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) ने 2018 में गूगल डीपमाइंड के सहयोग से एक पेपर प्रकाशित किया था। इसमें दिखाया गया था कि AI सिस्टम OCT स्कैन का विश्लेषण कर सकते हैं और 50 से अधिक रेटिनल रोगों के आधार पर उसका आकलन कर सकते हैं।
जानकारी
सिस्टम को चिकित्सीय मान्यता दिलाने का प्रयास
NHS ने कहा कि वह विभिन्न डाटा सेट पर एल्गोरिदम को प्रशिक्षित करके सिस्टम को चिकित्सीय रूप से मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सिस्टम बिना किसी भेदभाव और क्लीनिकल सेटिंग के सभी रोगियों के लिए काम करे।
मरीज
बढ़े हैं आंख के मरीज
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में इलाज से जुड़े विभिन्न विभागों में नेत्र विभाग में सबसे ज्यादा मरीज आए। NHS में अप्वाइंटमेंट लेने वाले कुल मरीजों में से लगभग 10 प्रतिशत नेत्र समस्याओं से जुड़े मरीज हैं।
आंख के रोगियों की यह संख्या प्रति वर्ष के हिसाब से 1 करोड़ है और बीते 5 वर्षों में आंख के मरीजों की संख्या एक तिहाई से अधिक बढ़ी है।
डायबिटीज
डायबिटीज और AMD है अंधेपन के प्रमुख कारण
18 से 65 वर्ष की आयु के बीच अंधेपन का मुख्य कारण डायबिटीज को माना गया है और बढ़ती उम्र के लोगों में उम्र संबंधित मैकुलर डीजेनरेशन (AMD) जैसी बीमारी भी बढ़ी है। इसे अंधेपन का सबसे आम कारण माना गया।
ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के एक अध्ययन के मुताबिक, यूरोप में 60 वर्ष से अधिक उम्र के 25.3 प्रतिशत लोगों में AMD के शुरुआती लक्षण हैं।
ब्रिटेन में प्रतिदिन लगभग 200 लोगों में AMD का विकसित हो रहा है।
गूगल
आंख की बीमारी पता लगाने वाले AI टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है गूगल
गूगल खुद अन्य बीमारियों के अलावा आंख की बीमारियों का पता लगाने वाली AI टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है।
हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल CEO सुंदर पिचई ने घोषणा की थी कि कंपनी अब AI के जरिए डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने में भी मदद करती है।
गूगल और अरविंद नेत्र अस्पताल के शोधकर्ताओं की एक टीम ने डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने के लिए एक ऑटोमैटेड रेटिनल डिजीज असेसमेंट (ARDA) नामक AI ऐप तैयार की थी।
डायग्नोस
कुछ ही सेकेंड में बीमारी डायग्नोस करने की क्षमता
शोधकर्ताओं की टीम द्वारा विकसित एल्गोरिदम बीमारी के संकेतों को पहचान सकता है और रोगी की रेटिना की तस्वीरों के जरिए कुछ ही सेकेंड में बीमारी को डायग्नोस कर सकता है।
इस एल्गोरिदम को जल्द ही इस्तेमाल किए जाने के लिए अनुमति मिलने की उम्मीद है। इससे आंखों की बीमारी का पता लगाने और उसके मैनेजमेंट का सिस्टम बदल जाएगा।
AI सिस्टम द्वारा नेत्र रोग की पहचान और उसका विश्लेषण नेत्र रोग विशेषज्ञ के बराबर स्तर का ही होता है।