
गूगल सर्च में जल्द शामिल होगा कंवर्सेशनल AI, सुंदर पिचई ने दिया संकेत- रिपोर्ट
क्या है खबर?
माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से कुछ महीनों पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस बिंग सर्च इंजन पेश किए जाने के बाद अब संकेत मिल रहा है कि गूगल सर्च भी जल्द ही कंवर्सेशनल AI से लैस होगा।
गूगल के CEO सुंदर पिचई ने एक इंटरव्यू में बताया कि कंवर्सेशनल AI दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन का एक अभिन्न अंग बन जाएगा।
पिचई ने यह भी कहा कि यूजर्स गूगल से प्रश्न पूछ सकेंगे और बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLMs) से जुड़ेंगे।
मॉडल
LLMs से यूजर्स को मिलेंगे ये फायदे
LLMs एक मशीन लर्निंग मॉडल है, जो विभिन्न प्रकार के नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) कार्यों को करता है। इसके कार्यों में टेक्स्ट जनरेट करना, उनको विभिन्न कैटेगरी में बांटना, कंवर्शेसनल तरीके से प्रश्नों का उत्तर देना और किसी भी टेक्स्ट का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना शामिल है।
जटिल प्रश्नों को बेहतर ढंग से समझने के लिए गूगल लंबे समय से आंतरिक रूप से LLM और AI सिस्टम का उपयोग कर रही है।
माइक्रोसॉफ्ट
बिंग में AI इंटीग्रेशन से हुआ फायदा
AI इंटीग्रेशन की दौड़ शुरू करने का श्रेय माइक्रोसॉफ्ट को जाता है। इसने OpenAI के ChatGPT को अपने सर्च इंजन बिंग और एज ब्राउजर में इंटीग्रेट कर इसकी शुरुआत की। बिंग को इसका फायदा भी मिला।
माइक्रोसॉफ्ट ने AI के क्षेत्र में काम करने के लिए OpenAI में पैसा लगाया तो गूगल ने अपना AI चैटबॉट बार्ड लॉन्च किया।
हालांकि, बार्ड ने लॉन्चिंग के वक्त गलत जवाब दिया था, इससे गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट को भारी नुकसान हुआ था।
गूगल
कई सर्च प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग कर रही है गूगल- पिचई
पिचई की टिप्पणियों से यह भी संकेत मिलता है कि गूगल अपने सर्च इंजन के जरिए यूजर्स को सीधे कंपनी के LLMs के साथ बातचीत करने देने की योजना बना रही है। यह कदम पारंपरिक लिंक आधारित सर्च में बड़ा बदलाव लाने वाला हो सकता है।
पिचई ने कहा कि गूगल कई नए सर्च प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग कर रही है। इनमें यूजर्स को उनके मूल प्रश्न से जुड़े फॉलो-अप प्रश्न पूछने की अनुमति देने वाले प्रोडक्ट भी हैं।
चैटबॉट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को रोकने की भी उठ रही है मांग
AI को लेकर दुनियाभर में चर्चा हो रही है। हालांकि, अपनी लॉन्चिंग के बाद बहुत तेजी से लोकप्रिय होने वाला AI चैटबॉट ChatGPT इस समय मुश्किलों में भी घिरता दिख रहा है। इटली सहित कुछ देशों ने इस पर बैन लगा दिया है।
दूसरी तरफ एलन मस्क और ऐपल के को-फाउंडर स्टीव वोज्नियाक जैसे कई टेक दिग्गज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को खतरा बताते हुए विकास पर कम से कम 6 महीनों के लिए रोक लगाने की भी मांग कर रहे हैं।