
चंद्रयान-3 अब चांद की सतह से 25 किलोमीटर दूर, 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग की उम्मीद
क्या है खबर?
भारत के चांद मिशन चंद्रयान-3 का लैंडर दूसरी और आखिरी डीबूस्टिंग के बाद ऐसे ऑर्बिट में पहुंच गया है, जहां से चांद का निकटमत बिंदु 25 किलोमीटर और सबसे दूर 134 किलोमीटर है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मुताबिक, इसी ऑर्बिट से यह 23 अगस्त, 2023 को चांद के दक्षिणी ध्रुव में सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा।
चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम स्वचालित मोड में चांद के ऑर्बिट में उतर रहा है।
मॉड्यूल
17 अगस्त को अलग हुए थे विक्रम लैंडर और अंतरिक्ष यान
18 अगस्त, 2023 को लैंडर विक्रम की पहली डीबूस्टिंग की गई थी, जिसके बाद विक्रम लैंडर 113 किलोमीटर X 157 किलोमीटर के ऑर्बिट में आ गया।
चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर और अंतरिक्ष यान (प्रोपल्शन मॉड्यूल) 17 अगस्त, 2023 को एक-दूसरे से अलग हो गए थे।
अलग होने के बाद लैंडर मॉड्यूल जहां चांद पर उतरने के करीब पहुंच रहा है वहीं प्रोपल्शन मॉड्यूल अब महीनों या वर्षों तक पृथ्वी की परिक्रमा करता रहेगा।
लैंडिंग
लैंडिंग के बाद लैंडर से बाहर निकलेगा रोवर
चांद पर सॉफ्ट लैंडिग के बाद लैंडर विक्रम के भीतर रखा रोवर प्रज्ञान बाहर निकलेगा और चांद की सतह की रासायनिक संरचना का अध्ययन करेगा और पानी की खोज करेगा।
रोवर के बाहर निकलने पर विक्रम उसकी तस्वीर लेगा। इसका जीवनकाल एक चंद्र दिवस है, जो पृथ्वी पर 14 दिनों के बराबर है।
चंद्रयान-2 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चंद्रयान-3 चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत का दूसरा प्रयास है।
रेट्रोफायरिंग
लैंडर घटा रहा है अपनी स्पीड
इस समय लैंडर रेट्रोफायरिंग कर रहा है यानी उल्टी दिशा में घूम रहा है और अपनी ऊंचाई कम करने के साथ ही नीचे उतरने की स्पीड भी धीमी कर रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के समय ISRO प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा था कि चंद्रयान-3 को 100 किलोमीटर वाले ऑर्बिट में लाएंगे और उसके बाद प्रोपल्शन विक्रम लैंडर अलग होंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
दरअसल, तय प्लान के हिसाब से सारे काम नहीं होते हैं।
लाइव
कब और कहां देख सकते हैं चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग?
ISRO ने कहा कि चंद्रयान-3 चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए तैयार है। यह उपलब्धि भारतीय विज्ञान, इंजीनियरिंग प्रोद्योगिकी और उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है जो अंतरिक्ष खोज में देश की प्रगति का प्रतीक है।
ISRO के मुताबिक, इसकी लैंडिंग के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण 23 अगस्त, 2023 को शाम 5:27 बजे से किया जाएगा।
लाइव कवरेज ISRO की वेबसाइट, फेसबुक पेज, यूट्यूब चैनल और डीडी नेशनल टीवी चैनल सहित कई प्लेटफॉर्मों के जरिए उपलब्ध होगा।
चुनौती
14 जुलाई को लॉन्च किया गया था चंद्रयान-3
अब सॉफ्ट लैंडिंग ISRO के लिए सबसे कठिन चुनौती है।
सोमनाथ ने कुछ समय पहले जानकारी दी थी कि सॉफ्ट लैंडिंग के लिए टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती हॉरिजॉन्टल (क्षैतिज) स्थिति वाले विक्रम लैंडर को वर्टिकल (लंबवत) रूप से उतारना है।
सॉफ्ट लैंडिंग की सफलता के बाद अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत सॉफ्ट लैंडिंग की क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश हो जाएगा।
बता दें कि चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था।
लूना
रूस के लूना-25 में आई तकनीकी खराबी
भारत के चंद्रयान-3 से पहले रूस के लूना-25 मिशन की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की उम्मीद थी। इस मिशन के 21 अगस्त को लैंडिंग की उम्मीद थी।
हालांकि, रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के एक पोस्ट के मुताबिक, तकनीकी खामी के चलते लूना-25 चांद की अपनी निर्धारित प्री-लैंडिंग ऑर्बिट में प्रवेश करने में सफल नहीं हो सका।
रूस ने लगभग 50 वर्ष बाद पहली बार अपने चांद मिशन लूना-25 को 11 अगस्त, 2023 को लॉन्च किया था।