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#NewsBytesExplainer: मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने वाले विधेयक पारित करा पाएगी सरकार? जानें नंबर गेम
केंद्र सरकार मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के लिए 3 विधेयक लेकर आई है

#NewsBytesExplainer: मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने वाले विधेयक पारित करा पाएगी सरकार? जानें नंबर गेम

लेखन आबिद खान
Aug 23, 2025
03:04 pm

क्या है खबर?

केंद्र सरकार गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होने पर प्रधानमंत्री, मंत्री और मुख्यमंत्री को पद से हटाने वाले विधेयक लेकर आई है। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में इससे जुड़े 3 विधेयक पेश किए हैं। इस दौरान विपक्ष ने विधेयक की प्रति फाड़कर उसके टुकड़े गृह मंत्री की ओर उछाले। हंगामे के बाद विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है। आइए जानते हैं क्या इन विधेयकों को सरकार पारित करा पाएगी।

विधेयक

सबसे पहले विधेयकों के बारे में जानिए

गृह मंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 को संसद में पेश किए हैं। इनमें प्रावधान है कि 5 साल से ज्यादा की सजा होने पर मुख्यमंत्री और मंत्री गिरफ्तार किए जाएंगे। 30 दिन तक लगातार हिरासत में रहने पर उन्हें पद से हटाया जा सकेगा। गिरफ्तारी के 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देने पर खुद पद से हट जाएंगे।

लोकसभा

लोकसभा में किसके पक्ष में हैं नंबर गेम?

इन तीनों विधेयकों में से एक संविधान संशोधन विधेयक है। इसे संसद के दोनों सदनों में से दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी है। फिलहाल लोकसभा में 542 सदस्य हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए कम से कम 361 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास 293 सदस्य हैं। ऐसे में इसे पारित कराना बड़ी चुनौती है। अगर समान विचारधारा वाली कुछ पार्टियां साथ आती हैं, तो भी रास्ता इतना आसान नहीं है।

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राज्यसभा

राज्यसभा में क्या है स्थिति?

राज्यसभा में भी लोकसभा जैसी ही स्थिति है। राज्यसभा में फिलहाल 239 सदस्य हैं। विधेयक दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए 160 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। फिलहाल उच्च सदन में NDA के 132 सदस्य हैं। ऐसे में यहां भी बिना विपक्ष की मदद के ये विधेयक पारित नहीं हो पाएगा। परेशानियां और भी हैं। यह विधेयक संघीय ढांचे को प्रभावित करता है। इसलिए इसे कम से कम आधे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुमोदन की जरूरत होगी।

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सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में भी मिल सकती है चुनौती

विपक्षी सांसदों ने विधेयक को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके पटनायक ने दैनिक भास्कर से कहा, "विधेयकों का इस्तेमाल राज्यों में विपक्षी सरकारों के खिलाफ ही होगा। केंद्र के हाथ में CBI और ED जैसी एजेंसियां हैं, जो सुनिश्चित कर सकती हैं कि किसे कितने दिन जेल में रखना है। इससे केंद्र सरकार मुख्यमंत्री या मंत्रियों से पद छीन सकेगी।"

वजह

इतनी अड़चनों के बावजूद विधेयक क्यों लाई सरकार?

जानकार इसे ध्यान भटकाने की राजनीति के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार में SIR और कांग्रेस के 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। ऐसे में विपक्ष के विरोध को सरकार भ्रष्टाचार विरोधी कदम को विफल करने और स्वच्छ राजनीति को रोकने की अनिच्छा के रूप में पेश करेगी। इससे ये भी संदेश जाएगा कि विपक्ष को जेल से सरकार चलाने में कोई परेशानी नहीं है।

आगे

अब आगे क्या होगा?

तीनों विधेयकों को JPC के पास भेजा गया है। इसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति विधेयक पर अपनी सिफारिशें और रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र में ये रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। इसके बाद रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाएगा और चर्चा होगी। सरकार के लिए ये जरूरी नहीं है कि वो JPC की सिफारिशों को स्वीकार करे।

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