साल में 2 बार आता है हिंदी दिवस? जानिए हिंदी और विश्व हिंदी दिवस में अंतर
क्या है खबर?
हर साल 14 सितंबर को देश हिंदी दिवस यानि राष्ट्रिय हिंदी दिवस मनाता है। साल 1949 में इसी दिन हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई थी।
यह दिन हिंदी भाषा के विषय में जागरूकता फैलता है और देशवासियों को उसका महत्त्व समझाता है। हालांकि, काफी कम लोग जानते हैं कि हिंदी दिवस साल में 2 बार मनाया जाता है।
आइए जानते हैं हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस के बीच क्या अंतर होता है।
राष्ट्रिय
ऐसे हुई थी राष्ट्रीय हिंदी दिवस मानाने की शुरुआत
हिंदी दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के लिए जानी जाती है।
हालांकि, अंग्रेजों के शासन में अंग्रेजी को राजभाषा का दर्जा मिला था और हिंदी को महत्त्व नहीं दिया जाता था।
आजादी मिलने के बाद संविधानिक सभा ने 1949 में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया था।
इस निर्णय के सम्मान में 14 सितंबर, 1949 को पहली बार हिंदी दिवस मनाया गया था।
वैश्विक
जानिए क्यों मनाया जाता है विश्व हिंदू दिवस
2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनियाभर में हिंदी को मान्यता और सम्मान देने के लिए 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में घोषित किया था।
साल 1975 को इसी दिन नागपुर में पहले विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन भी किया गया था।
विश्व हिंदी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी को एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा देना और इसे वैश्विक स्तर पर मजबूत करना है।
अंतर
हिंदी दिवस और विश्व हिंदी-दिवस एक दूसरे से कैसे हैं अलग?
राष्ट्रीय हिंदी दिवस मुख्य रूप से भारत में मनाया जाता है, जबकि विश्व हिंदी दिवस वैश्विक स्तर पर मनता है।
यह दिन नेपाल, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे दुनिया के विभिन्न हिस्सों के हिंदी बोलने वाले समुदायों को एक साथ लाता है।
एक ओर जहां विश्व हिंदी दिवस दुनियाभर में हिंदी भाषा का महत्त्व समझाता है, वहीं हिंदी दिवस एक आजाद भारत की भी याद दिलाता है।
इस दिन सभी स्कूलों, कॉलेजों और कार्यलायों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
महत्त्व
हिंदी दिवस मानना क्यों है जरूरी?
हिंदी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा में बात-चीत करने को बढ़ावा देना है। बढ़ती आधुनिकता और इंटरनेट के कारण भारतीय लोग अंग्रेजी भाषा को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं।
इससे हिंदी भाषा का महत्त्व और प्रभाव भी कम होने लगा है। ऐसे में यह दिन बच्चों के बीच हिंदी की जागरूकता को बढ़ाने और उन्हें हिंदी बोलने के लिए प्रेरित करने को समर्पित है।