
एकता की मिसाल: पुलवामा में मुस्लिम और पंडित मिलकर कर रहे मंदिर की मरम्मत
क्या है खबर?
आतंकी हमले के कारण चर्चा में आए पुलवामा से अब सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर सामने आई है।
आतंकी हमले की जगह से 15 किलोमीटर दूर अचान गांव में मुस्लिम और पंडित मिलकर 80 साल पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार करने में लगे हैं।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, यह काम काफी समय से चल रहा था, लेकिन पुलवामा हमले के बाद रुक गया था। अब महाशिवरात्रि के मौके पर यहां दोबारा काम शुरू हुआ है।
काम
'मंदिर में बजे घंटी और मस्जिद से आए अजान की आवाज'
पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद देशभर में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ मारपीट और उत्पीड़न की खबरें आई थी।
इसके बाद कुछ दिन तक मंदिर का काम रोक दिया गया था। तब से रुका हुआ काम महाशिवरात्रि से दोबारा शुरू हुआ है।
इस मंदिर के बगल में ही मस्जिद मौजूद है। मंदिर के जीर्णोद्धार में लगे ग्रामीणों का कहना है कि वे मंदिर की घंटी और मस्जिद की अजान एक साथ सुनना चाहते हैं।
बयान
'शायद पुराना वक्त लौट आए!'
मंदिर पर काम कर रहे ग्रामीण मोहम्मद यूनिस ने कहा, "हम चाहते हैं कि 30 साल पुराना वो वक्त एक बार फिर लौट आए, जब एक तरफ मंदिर की घंटियां बजती थी और दूसरी तरफ मस्जिद से अजान की आवाज आती थी।"
सौहार्द
मस्जिद की समिति करवा रही मंदिर की मरम्मत
खास बात यह है कि इस गांव में सिर्फ एक ही पंडित परिवार है। 1990 में कश्मीर से हिंदूओं के पलायन के समय यह परिवार ही गांव में रुका था।
ग्रामीणों ने बताया कि पंडित परिवार ने मस्जिद समिति के सामने मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव रखा था।
इस पर ग्रामीणों ने मिलकर 80 साल पुराने इस मंदिर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। ग्रामीण भूषण लाल ने बताया कि उनके मुस्लिम भी मंदिर में आते हैं।
एकता
'भाइयों की तरह रहते हैं हिंदू-मुस्लिम'
दूसरे ग्रामीण संजय कुमार ने कहा कि उनके मुस्लिम पड़ोसियों न सिर्फ मंदिर बनवाने में मदद कर रहे हैं बल्कि हर मुश्किल घड़ी में उन्होंने उनका साथ दिया है।
संजय ने बताया कि वे यहां भाइयों की तरह रह रहे हैं।
मंदिर की मरम्मत का काम देख रहे मोहम्मद मकबूल ने कहा कि वे मंदिर के जीर्णोद्धार में लगे हैं ताकि उनके पंडित भाइयों को यह महसूस न हो कि वे अकेले हैं और उनका मंदिर अधूरा है।