
चीन की वैक्सीन पर शंकाओं के बाद भारत से वैक्सीन लेना चाहते हैं कई देश
क्या है खबर?
चीन से कोरोना वायरस वैक्सीन खरीदने की बात कर चुके देश अब भारत की तरफ देख रहे हैं।
दरअसल, ब्राजील और कंबोडिया समेत कई देशों को चीन ने वैक्सीन देने की पेशकश की थी या इन देशों से वैक्सीन खरीदने की बात की थी, लेकिन अब ये चीनी वैक्सीनों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
चीन की कई वैक्सीनों की प्रभावकारिता (एफिकेसी) पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में ये देश भारत से वैक्सीन खरीदना चाहते हैं।
कोरोना वैक्सीन
कोविशील्ड खरीदने की इच्छा दिखा रहे कई देश
पिछले कुछ दिनों से भारत को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा बनाई जा रही कोविशील्ड को लेकर कई निवेदन मिले हैं।
कई देश मदद के तौर पर भारत से वैक्सीन चाहते हैं तो कुछ ने वैक्सीन खरीदने की इच्छा जताई है।
भारत द्वारा सात पड़ोसी देशों को मदद के तौर पर वैक्सीन भेजने के बाद ये मांग और ज्यादा बढ़ गई है।
गौरतलब है कि SII एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का उत्पादन कर रही है।
कोरोना वैक्सीन
भारत ने शुरू की वैक्सीन की व्यवसायिक आपूर्ति
शुक्रवार से भारत ने कोविशील्ड की व्यावसायिक आपूर्ति शुरू करते हुए ब्राजील को इसकी 20 लाख खुराकें भेजी थीं।
ब्राजील में राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो और कई गवर्नरों के बीच कोविशील्ड और चीनी कंपनी सिनोवैक की बनाई कोरोनावैक में से एक को चुनने को लेकर विवाद चल रहा है।
बोल्सोनारो ने भारत से कोविशील्ड की खेप को जल्द ब्राजील भेजने की मांग की थी, लेकिन भारत ने घरेलू जरूरतों को देखते हुए निर्यात में देरी कर दी।
कोरोना वैक्सीन
भारत से और खुराकें खरीदेगा ब्राजील
भारत से वैक्सीन मिलने में हुई देरी के कारण ब्राजील के साओ पाउलो के गवर्नर जोआओ डोरिया ने चीनी वैक्सीन के साथ अपने राज्य में वैक्सीनेशन अभियान शुरू कर दिया था। डोरिया को 2022 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में बोल्सोनारो का मुख्य प्रतिदंवंद्वी माना जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि ब्राजील अपनी पूरी आबादी को वैक्सीन लगाना चाहता है और इसके लिए वह भारत से कोविशील्ड खरीदने के साथ-साथ अपने यहां भी उसका उत्पादन शुरू करेगा।
जानकारी
इंडोफार्मा कर रही सीरम इंस्टीट्यूट से बातचीत
चीन ने इंडोनेशिया को वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने के लिए कोरोनावैक की 30 लाख खुराक की दी थी। इंडोनेशिया अब भारत से कोविशील्ड खरीदने के प्रयास में है। यहां खकी इंडोफार्मा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के साथ इस सौदे को लेकर बातचीत कर रही है।
वैक्सीन
कंबोडिया ने भी भारत से मांगी मदद
इससे पहले सोमवार कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने भी भारत से वैक्सीन को लेकर मदद मांगी थी।
बताया जा रहा है कि कंबोडिया कोविशील्ड के साथ-साथ भारत बायोटेक द्वारा तैयार की गई कोवैक्सिन खरीदने का भी इच्छुक है।
चीन ने पहले ही कंबोडिया को मदद के तौर पर सिनोवैक की 10 लाख खुराकें भेजी थीं।
सूत्रों का कहना है कि कंबोडिया को अपनी अधिकतर आबादी को संक्रमण से बचाने के लिए और वैक्सीन की जरूरत होगी।
पारदर्शिता का मामला
चीन की वैक्सीन पर क्यों उठ रहे सवाल?
दरअसल, चीन ने कई देशों में अपनी वैक्सीनों के ट्रायल किए हैं और कई जगहों पर उनके नतीजे अलग-अलग हैं।
ब्राजील में हुए ट्रायल में कोरोनावैक 50 प्रतिशत प्रभावी पाई गई थी, वहीं इंडोनेशिया में यह संक्रमण रोकने में 65.3 प्रतिशत सफल हुई थी।
दूसरा यह भी कहा जा रहा है कि चीन वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रहा है, जिससे इन नतीजों पर भरोसा करना काफी मुश्किल हो रहा है।
वैक्सीन आपूर्ति
भारत को मिलेगी कूटनीतिक बढ़त- भाटिया
इस बारे में बात करते हुए पूर्व राजदूत राजीव भाटिया ने HT से कहा कि दुनियाभर के देश वैक्सीन के लिए किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भर नहीं रह सकते और वो अपने लिए विकल्प देख रहे हैं। भले ही कुछ वैक्सीन बहुत प्रभावी नहीं है, लेकिन वो चीन को ना नहीं कह सकते।
वहीं भारत के नजरिये से इसे अच्छा बताते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत की छवि अच्छी है और इससे कूटनीतिक मदद मिलेगी।