
विदेश में मौत होने पर परिजन कैसे मंगवा सकते हैं शव? जानिए पूरी प्रक्रिया
क्या है खबर?
विदेशों में हर साल विभिन्न कारणों से हजारों भारतीयों की मौत होती है और उनके शवों को मंगवाने में परिजनों को मुश्किलें झेलनी पड़ती है।
कुवैत में भी 12 जून को छह मंजिला इमारत में लगी आग में झुलसने 45 भारतीय कामगारों की मौत हो गई थी।
हालांकि, विदेश मंत्रालय के सहयोग से सभी शवों को वापस मंगवा लिया गया था।
ऐसे में आइए विदेशों से शव वापस भारत मंगवाने या वहीं अंतिम संस्कार करने की पूरी प्रक्रिया जानते हैं।
मौत
विदेशों में पिछले 10 सालों में हुई 47,000 से अधिक भारतीयों की मौत
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद डाटा के अनुसार, साल 2015 से जून 2024 तक विदेशों में जिन भारतीयों की मौत हुई उनमें से 47,873 शव भारत लाए गए हैं।
ये मौतें प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों कारणों से हुई हैं।
इनमें 2015 से जून 2024 तक हर साल क्रमश: 4,145, 4,165, 4,222, 4,205, 5,291, 5,320, 5,833, 5,948, 6,532 और 2,310 शव मंगवाए गए हैं।
इसमें वहां अंतिम संस्कार किए गए शवों का आंकड़ा शामिल नहीं है।
औसत
विदेशों में औसतन हर 2 घंटे में हुई एक भारतीय मौत
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 10 सालों में विदेशों में हर साल औसतन 4,786 भारतीयों की मौत हुई है।
इसे यदि रोजाना के हिसाब से निकाले तो औसतन 13 भारतीय मौत का शिकार हुए हैं।
घंटों में इसका औसत निकालने पर यह संख्या हर 2 घंटे में एक भारतीय की मौत पर आ जाती है।
ऐसे में स्पष्ट है कि विदेश मंत्रालय औसतन हर दिन 13 शव वापस मंगवा रहा है।
जानकारी
विदेशों में कितनी है भारतीय आबादी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में कुल लगभग 2.90 करोड़ भारतीय रहते हैं। प्रवासी भारतीय दुनिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदाय का गठन करते हैं। प्रतिवर्ष 25 लाख भारतीय विदेश जाते हैं, जो दुनिया में प्रवासियों की सबसे अधिक वार्षिक संख्या है।
प्रक्रिया
विदेशों से शव वापस मंगवाने की क्या है प्रक्रिया?
विदेश मंत्रालय के नियमानुसार, किसी भारतीय के शव को वापस लाने के लिए संबंधित भारतीय मिशन/पोस्ट पर मृत्यु का पंजीकरण आवश्यक है।
इसके लिए अस्पताल से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र, आकस्मिक या अप्राकृतिक मृत्यु के मामले में विस्तृत पुलिस रिपोर्ट की प्रति (अंग्रेजी अनुवाद के साथ) और नश्वर अवशेषों के परिवहन के लिए मृतक के निकटतम रिश्तेदार का नोटरी द्वारा सत्यापित सहमति पत्र, पासपोर्ट और वीजा पृष्ठों की प्रति जरूरत होती है।
जानकारी
अन्य आवश्यक दस्तावेज या मंजूरी
शव मंगवाने के लिए अन्य दस्तावेजों जैसे कि शव को सड़ने से बचाने के लिए लेप लगाने की मंजूरी और व्यवस्था और स्थानीय आव्रजन/सीमा शुल्क विभाग से मंजूरी की भी आवश्यकता होती है। ये प्रक्रियाएं अलग-अलग देशों में भिन्न हो सकती हैं।
अपडेट
शव को वापस लाने के संबंध में कैसे मिलता है अपडेट?
शव वापस लाने के पंजीकरण के बाद संबंधित भारतीय दूतावास अधिकारी पार्थिव शरीर के परिवहन की सुविधा के लिए उनके निकटतम संबंधियों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं और आवश्यक अपडेट देते हैं।
वह प्रक्रिया में तेजी के लिए संबंधित विदेशी अधिकारियों से भी संपर्क बनाए रखते हैं।
इसी तरह शव के परिवहन की देखभाल के लिए किसी मित्र या रिश्तेदार उपलब्ध न होने पर परिजन भारतीय दूतावास को परिवहन की व्यवस्था के लिए अधिकृत कर सकते हैं।
समय
शव वापसी में कितना लगता है समय?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, शव वापसी के समय की प्रक्रिया सभी देशों में अलग-अलग होती है।
खाड़ी देशों में स्थानीय प्रक्रियाओं के कारण सामान्य समय सीमा 2 से 4 सप्ताह तक होती है। अगर मृत्यु अप्राकृतिक कारणों से हुई है और मृत्यु के कारण का पता लगाने के लिए जांच चल रही है, तो इसमें और अधिक समय लग सकता है।
हालांकि, भारतीय दूतावास प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए संबंधित स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में रहता है।
सवाल
क्या विदेश में भी किया जा सकता है अंतिम संस्कार?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश में ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए परिजनों को पंजीकरण के समय अन्य दस्तावेजों के साथ इसका भी सत्यापित सहमति पत्र देना होता है।
इसके बाद संबंधित दूतावास के अधिकारी निकटतम मित्र या रिश्तेदार के साथ मिलकर मृतक के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराते हैं।
परिजन या किसी रिश्तेदार के के नहीं होने पर दूतावास अधिकारी विशेष निवेदन पर स्वयं यह जिम्मेदारी भी ले सकते हैं।
बाध्यता
खाड़ी देशों में केवल मुस्लिमों को ही दफनाने की अनुमति
खाड़ी में स्थति अधिकांश देश केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों के शवों को ही अपने देश में शव दफानने की अनुमति देते हैं।
इसके लिए भी मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी की सहमति की आवश्यकता होती है।
अन्य समुदाय के लोगों की मौतों के मामले में शवों को उनके गृह देशों में वापस भेजा जाना आवश्यक होता है।
इसी प्रकार लावारिस शवों के मामले में स्थानीय अधिकारी उनके अंतिम संस्कार के लिए उचित कदम उठाते हैं।