
अफगानिस्तान में फिर भूकंप के तेज झटके, 20 मिनट में 2 बार कांपी धरती
क्या है खबर?
अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। आज (15 अक्टूबर) की सुबह 20 मिनट के अंतराल में 2 बार अफगानिस्तान की धरती कांपी है।
पहले झटके की तीव्रता 6.3 और दूसरे की 5.4 मापी गई है। हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
बता दें कि हाल ही में अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में आए भूकंप में 2,000 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
केंद्र
कहां था भूकंप का केंद्र?
यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) ने बताया कि पहला झटका भारतीय समयानुसार सुबह 9:06 बजे पर हेरात प्रांत से 33 किलोमीटर दूर आया। इसका केंद्र जमीन से 70 किलोमीटर नीचे था।
दूसरा झटका 9:26 बजे हेरात में ही आया। इसकी तीव्रता 5.4 थी और केंद्र जमीन से 30 किलोमीटर नीचे था।
झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल है और लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए हैं।
भूकंप
7 अक्टूबर को आए भूकंप में मारे गए थे 2,000 लोग
अफगानिस्तान में 7 अक्टूबर को भी 6.3 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। हेरात प्रांत में आए इस भूकंप में दर्जनों गांव मलबे में बदल गए थे और सैकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा था।
इस भूकंप में 2,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं।
भूकंप के बाद तालिबान ने विश्व समुदाय से मदद की अपील की थी। इसे पिछले 2 दशक में आए सबसे विनाशकारी भूकंप में से एक कहा गया था।
मौतें
पिछले साल भूकंप से हुई थीं 1,000 मौतें
पिछले साल जून में भी अफगानिस्तान में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 1,000 लोग मारे गए थे और 1,500 घायल हुए थे।
काबुल से करीब 262 किलोमीटर दूर पकतिका में भूकंप की वजह से सबसे ज्यादा तबाही हुई थी। ये भूकंप रात करीब डेढ़ बजे आया था, इसलिए ज्यादातर लोग सो रहे थे और उन्हें भागने का मौका नहीं मिला।ॉ
इसका असर पाकिस्तान के कई शहरों तक देखा गया था।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र भूकंप के लिहाज से अतिसंवेदनशील है और यह अफगानिस्तान की हिंदू कुश पहाड़ियों से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है।
अफगानिस्तान में अधिक भूकंप आने के पीछे का कारण है कि यह देश कई 'फॉल्ट लाइन' के शीर्ष पर स्थित है। फॉल्ट लाइन का आशय उस हिमालयी क्षेत्र से है, जहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टॉनिक प्लेटें आपस में जुड़ी हैं, जिनमें हलचल होने के कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं।